बिलासपुर…. छत्तीसगढ़ की जेलों में कैदियों की बढ़ती संख्या ने जेल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश की 33 जेलों में निर्धारित क्षमता से करीब 8 हजार अधिक कैदी बंद हैं। राज्य सरकार के शपथपत्र के मुताबिक, 30 सितंबर 2026 तक जेलों में 22,980 कैदी थे, जबकि सभी जेलों की कुल क्षमता 15,025 कैदियों की है। यानी मौजूदा व्यवस्था में 7,955 कैदी निर्धारित क्षमता से अधिक रखे गए हैं।

कैदियों की संख्या और जेलों की क्षमता के बीच बढ़ते अंतर के बीच बेमेतरा जिले में प्रस्तावित खुली जेल भी अब तक शुरू नहीं हो पाई है। पथर्रा गांव में 200 कैदियों की क्षमता वाली खुली जेल स्थापित करने के लिए सरकार अधिसूचना जारी कर चुकी है। इसके संचालन के लिए 48 पद सृजित करने पर विचार चल रहा है। 21 सितंबर 2026 के आदेश से 15 कर्मचारियों की तैनाती को मंजूरी भी दी गई, लेकिन सुरक्षा संबंधी मुद्दों के कारण जेल का संचालन शुरू नहीं हो सका है। अधीक्षक की नियुक्ति और सीधी भर्ती की अनुमति का मामला भी विचाराधीन है।

पुनर्वास के लिए प्रशिक्षण,रोजगार पर जोर

राज्य सरकार ने शपथपत्र में कैदियों को जेल से बाहर आने के बाद रोजगार से जोड़ने के प्रयासों का भी उल्लेख किया है। इसके तहत 17 अगस्त 2026 को जन शिक्षण संस्थान, रायपुर के साथ समझौता किया गया। योजना के अनुसार, कैदियों को व्यावसायिक प्रशिक्षण और प्रमाणपत्र देने के साथ औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों, आजीविका कॉलेजों और दूसरे कौशल विकास केंद्रों से जोड़ने की पहल की जाएगी। इसका उद्देश्य रिहाई के बाद उनके लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर तैयार करना है।

जेलों में काम करने वाले कैदियों के पारिश्रमिक की दरें बढ़ाने और उनमें संशोधन पर भी विचार किया जा रहा है। इसके अलावा, 12 फरवरी 2026 को इंडियन ओवरसीज बैंक के साथ समझौता किया गया है। इसके माध्यम से पात्र कैदियों को रिहाई के बाद बैंकिंग और ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है, ताकि वे स्वरोजगार शुरू कर सकें और अपनी आजीविका का स्थायी साधन विकसित कर सकें।

2 दिसंबर को फिर सुनवाई

जेलों में क्षमता से अधिक कैदियों और उनसे जुड़े इंतजामों के मामले में मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र तथा न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने राज्य सरकार का शपथपत्र रिकॉर्ड पर लिया है। हाईकोर्ट ने मामले को निगरानी में रखते हुए अगली सुनवाई के लिए 2 दिसंबर 2026 की तारीख तय की है। अब आगे की सुनवाई में जेलों की क्षमता, बेमेतरा की खुली जेल की शुरुआत और कैदियों के पुनर्वास से जुड़े कदमों पर नजर रहेगी।