बिलासपुर…विजयादशमी पर रावण दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, लेकिन बिलासपुर में इस बार रावण के पुतले से ज्यादा चर्चा उसे जलाने के आयोजन पर हो रही है।

साइंस कॉलेज मैदान में रावण दहन को लेकर कांग्रेस और शासन-प्रशासन के बीच ऐसा टकराव हुआ कि मैदान में प्रवेश नहीं मिला तो कांग्रेस नेताओं ने मुख्य द्वार के बाहर सड़क पर ही रावण दहन कर दिया।

हाथों में बैनर और कार्डबोर्ड लेकर उतरे कांग्रेस नेताओं ने नगर निगम के 24 लाख रुपये के आयोजन पर सवाल उठाए और स्थानीय विधायक पर भ्रष्टाचार तथा भाई-भतीजावाद के आरोप लगाए। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कांग्रेस नेताओं के बीच तनातनी रही। सरकंडा मार्ग पर भी कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अरपांचल समिति लंबे समय से साइंस कॉलेज मैदान में रावण दहन का आयोजन करती आ रही है। उनके मुताबिक, इस आयोजन को पहले शासन-प्रशासन की अनुमति भी मिलती रही है और समिति सीमित खर्च में बड़े स्तर पर कार्यक्रम आयोजित करती रही है।

इस बार समिति को अनुमति नहीं मिलने और नगर निगम की ओर से करीब 24 लाख रुपये खर्च कर अलग से रावण दहन कार्यक्रम आयोजित करने के फैसले ने विवाद खड़ा कर दिया। कांग्रेस ने इसे वर्षों से चली आ रही परंपरा में हस्तक्षेप बताते हुए सवाल किया कि जब पहले कम खर्च में आयोजन होता रहा है, तो अब सरकारी खजाने पर इतना बड़ा बोझ डालने की जरूरत क्यों पड़ी?

बजट नहीं, रावण दहन के लिए 24 लाख?

वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं विजय केशरवानी, सिद्धांशु मिश्रा, अंकित गौरहा, स्वप्निल शुक्ला, राजेंद्र साहू ‘डब्बू’ और शिल्पी तिवारी सहित अन्य नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान निगम प्रशासन के फैसले पर तीखे सवाल उठाए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में सड़कें और नालियां जर्जर हैं, बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोग परेशान हैं, लेकिन उत्सव के आयोजन पर 24 लाख रुपये खर्च करने का ऐलान कर दिया गया। उनका दावा था कि इतनी राशि से तीन वार्डों में नालियों के निर्माण जैसे जरूरी काम कराए जा सकते हैं।

प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि जब नगर निगम और सरकार के पास विकास कार्यों के लिए पर्याप्त धन नहीं होने की बात सामने आती है, तब रावण दहन के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च करने का निर्णय किस आधार पर लिया गया? कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि यह जनभावनाओं के विपरीत फैसला है और इससे सरकारी धन के इस्तेमाल की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। हालांकि, 24 लाख रुपये के खर्च में किन मदों पर कितनी राशि प्रस्तावित है और आयोजन की लागत का आधिकारिक औचित्य क्या है, इसका जवाब संबंधित प्रशासनिक पक्ष से आना बाकी है।

परंपरा समिति की, आयोजन सरकारी ?

कांग्रेस ने आयोजन को लेकर एक और सवाल उठाया। नेताओं का कहना था कि पुलिस लाइन मैदान में नगर निगम की ओर से रावण दहन का कार्यक्रम पहले से आयोजित होता रहा है। ऐसे में एक ही निगम क्षेत्र में अलग-अलग सरकारी आयोजनों की जरूरत क्यों पड़ी? अरपांचल समिति के पारंपरिक आयोजन को अनुमति नहीं देना और उसी बीच सरकारी खर्च पर दूसरा कार्यक्रम आयोजित करना किस नीति के तहत तय हुआ?

कांग्रेस नेताओं ने यह भी सवाल किया कि जब कार्यक्रम सरकारी धन से आयोजित किया जा रहा है, तो उसके आमंत्रण और श्रेय में किसी स्थानीय जनप्रतिनिधि को प्रमुखता देने का आधार क्या है? उनका कहना था कि सार्वजनिक धन से होने वाला आयोजन जनता और नगर निगम का कार्यक्रम होना चाहिए, न कि किसी व्यक्ति विशेष की प्रतिष्ठा का माध्यम। इन सवालों के साथ कांग्रेस ने टेंडर प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई। नेताओं ने पूछा कि 24 लाख रुपये के आयोजन का ठेका किसे दिया गया है, किस प्रक्रिया से दिया गया और खर्च का पूरा ब्योरा क्या है।

पुलिस से तनातनी, आखिर सड़क पर जला रावण

विरोध जताने के लिए कांग्रेस नेता रावण का पुतला लेकर साइंस कॉलेज मैदान पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें मैदान के भीतर जाने से रोक दिया। इसके बाद नेताओं ने मुख्य द्वार के सामने बैनर और कार्डबोर्ड लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थानीय विधायक और निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कांग्रेस नेताओं ने फैसले को वापस लेने और पूरे खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों को कांग्रेस नेताओं को समझाने में मशक्कत करनी पड़ी। करीब एक घंटे तक खींचतान और बातचीत का दौर चलता रहा। आखिरकार कांग्रेस नेता अपना रावण लेकर मुख्य द्वार से बाहर सड़क पर पहुंचे और वहीं उसका दहन कर दिया। इस दौरान सरकंडा मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ और पुलिस को व्यवस्था संभालनी पड़ी।

कांग्रेस का आरोप—त्योहार का सरकारीकरण

विजय केशरवानी, सिद्धांशु मिश्रा और अंकित गौरहा सहित प्रदर्शन में शामिल नेताओं ने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक के दबाव में अरपांचल समिति के आयोजन को रोका गया और सरकारी खर्च से नया कार्यक्रम तय किया गया। उन्होंने इसे क्षेत्र में असंतोष बढ़ाने वाला फैसला बताते हुए कहा कि त्योहारों की परंपरा में राजनीतिक दखल नहीं होना चाहिए। नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र के विकास की अनदेखी हो रही है, जबकि सरकारी आयोजन के नाम पर बड़ी राशि खर्च की जा रही है।

कांग्रेस नेताओं ने टेंडर और खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग दोहराते हुए कहा कि वे इस मुद्दे को चुपचाप खत्म नहीं होने देंगे। उनका कहना था कि यदि आयोजन पूरी तरह सरकारी धन से हो रहा है, तो उसकी लागत, ठेकेदार, स्वीकृति और खर्च की मदों की जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए। इन आरोपों पर स्थानीय विधायक और नगर निगम प्रशासन का पक्ष सामने आने पर ही विवाद के दूसरे पहलू की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।