बिलासपुर…. आजादी के पर्व की पूर्व संध्या पर बिलासपुर पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ ऐसी मुहिम की शुरुआत की है, जिसमें पुलिस के साथ आम नागरिक भी सीधे मोर्चे पर नजर आएगा। साइबर ठगी, डिजिटल गिरफ्तारी, फर्जी कॉल, नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी और सामाजिक माध्यमों से होने वाले अपराधों के खिलाफ 15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक सात सप्ताह का ‘साइबर जागृति अभियान’ चलेगा। खास बात यह है कि इस अभियान में सोशल मीडिया को केवल सूचना प्रसार का माध्यम नहीं, बल्कि साइबर अपराध के खिलाफ जनभागीदारी का हथियार बनाया गया है।

बिलासपुर में पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग और उपमहानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में अभियान का क्यूआर कोड और लिंक जारी कर इसकी शुरुआत की। दोनों अधिकारियों ने स्वयं क्यूआर कोड स्कैन कर जागरूकता संदेश वाली सेल्फी ली और उसे अपने सामाजिक माध्यमों पर साझा किया। इसके साथ ही बिलासपुर में अभियान ने जमीन से लेकर डिजिटल दुनिया तक अपनी दस्तक दे दी।

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एक सेल्फी बनेगी हजारों लोगों वाला संदेश

अभियान की सबसे अलग पहल ‘साइबर जागृति की एक सेल्फी’ है। नागरिक बिलासपुर पुलिस के सोशल मीडिया माध्यमों पर जारी लिंक अथवा क्यूआर कोड को स्कैन कर जागरूकता संदेश वाली सेल्फी फ्रेम में अपनी तस्वीर ले सकेंगे। इसके बाद वे इसे अपने सोशल मीडिया खातों पर साझा करेंगे।

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पुलिस का अनुमान है कि जब एक व्यक्ति अपनी सेल्फी साझा करेगा तो उसके मित्रों, अनुयायियों और संपर्कों तक भी साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचेगा। इस तरह एक व्यक्ति की छोटी-सी भागीदारी कई लोगों तक जागरूकता पहुंचाने का माध्यम बन सकती है।

सात सप्ताह, सात मोर्चे— हर चाल पर फोकस

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बिलासपुर पुलिस ने अभियान को केवल पोस्टर और अपील तक सीमित नहीं रखा है। सात सप्ताह के दौरान साइबर अपराध के अलग-अलग रूपों को केंद्र में रखकर कार्यक्रम होंगे। पहले सप्ताह स्कूल-कॉलेजों में डिजिटल सतर्कता और बुनियादी सुरक्षा पर अभियान चलेगा। दूसरे सप्ताह बैंकिंग एवं वित्तीय संस्थानों में वित्तीय धोखाधड़ी और यूपीआई सुरक्षा पर जागरूकता कार्यक्रम होंगे।

तीसरे सप्ताह वरिष्ठ नागरिकों के लिए डिजिटल गिरफ्तारी और फर्जी कॉल के खिलाफ टाउन हॉल आयोजित होगा। चौथे सप्ताह महिला महाविद्यालयों और सामुदायिक समूहों में स्मार्टफोन गोपनीयता तथा सुरक्षित इंटरनेट उपयोग पर चर्चा होगी। पांचवें सप्ताह रोजगार कार्यालयों, आईटीआई और कौशल विकास केंद्रों में नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी तथा फिशिंग से युवाओं को सावधान किया जाएगा।

छठे सप्ताह डेटा गोपनीयता और सामाजिक माध्यमों के सुरक्षित उपयोग पर अभियान चलेगा, जबकि सातवें सप्ताह ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में गांधी जयंती के अवसर पर ‘साइबर मुक्त छत्तीसगढ़’ का संकल्प दिलाया जाएगा। 2 अक्टूबर को अभियान का समापन होगा।

एसएसपी बोले— पुलिस एकजुटता से जवाब देगी

आईजी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने कहा कि साइबर अपराध से लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा, “साइबर अपराधी तकनीक और लोगों की छोटी-सी चूक का फायदा उठाते हैं। हमारी कोशिश है कि वही तकनीक अब जागरूकता का माध्यम बने। यदि एक नागरिक सावधान होता है तो वह केवल खुद को नहीं, अपने परिवार और संपर्कों से जुड़े कई लोगों को भी ठगी से बचा सकता है।”

उन्होंने कहा कि सात सप्ताह का अभियान समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंचने की रणनीति के साथ तैयार किया गया है। स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों से लेकर व्यापारी, बैंक ग्राहक, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक, नौकरी तलाश रहे युवा और ग्रामीण क्षेत्र के नागरिक—हर वर्ग को उसकी जरूरत के मुताबिक साइबर सुरक्षा की जानकारी दी जाएगी।

 आजादी के संकल्प से साइबर सुरक्षा

पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने कहा कि जिस तरह स्वतंत्रता के लिए देशवासियों ने एकजुट होकर संघर्ष किया, उसी भावना से साइबर अपराध के खिलाफ भी समाज को एकजुट होना होगा। उन्होंने नागरिकों से जागरूकता की सेल्फी लेकर उसे सामाजिक माध्यमों पर साझा करने की अपील की, ताकि साइबर सुरक्षा का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे।

अभियान के दौरान पुलिस टीमें सार्वजनिक स्थानों, चौक-चौराहों, बाजारों और पार्कों में पोस्टर-बैनर के जरिए क्यूआर कोड का प्रचार करेंगी। पुलिस के सोशल मीडिया माध्यमों के साथ एफएम रेडियो, आकाशवाणी और विभिन्न व्हाट्सऐप समूहों के जरिए भी अभियान को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा।

पुलिस मुख्यालय से निकला मुहिम

छत्तीसगढ़ पुलिस के साइबर जागृति अभियान के प्रदेशव्यापी शुभारंभ के साथ बिलासपुर पुलिस ने इसे स्थानीय स्तर पर व्यापक स्वरूप दिया है। प्रेस वार्ता में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर पंकज कुमार पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मधुलिका सिंह, उप पुलिस अधीक्षक पुलिस लाइन मंजूलता केरकेट्टा सहित पुलिस अधिकारी-कर्मचारी, मीडिया प्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग मौजूद रहे।