“क्षितिज अपार संभावनाएं योजना”…. उम्मीदें जगाने वाला यह सुंदर सा नाम प्रदेश के समाज कल्याण विभाग ने अपनी एक योजना को दिया है। जिसके तहत दिव्यांग छात्र-छात्राओं को पढ़ाई लिखाई के लिए मदद का प्रावधान है। इसका लाभ लेकर दिव्यांग छात्र दूसरे शहर में जाकर अच्छी पढ़ाई कर सकते हैं। लेकिन सच्चाई है कि बिलासपुर के कॉलेज में पढ़ रहे कई दिव्यांग छात्र पिछले काफी समय से अपने रहने -खाने की व्यवस्था को लेकर केवल लिखा – पढ़ी कर रहे हैं। कलेक्टर से लेकर समाज कल्याण विभाग संचालनालय तक चिट्ठियों पर चिट्ठियां चल रही हैं। लेकिन दिव्यांग छात्र अब भी भटक रहे हैं। दृष्टिहीन छात्रों की जिंदगी वैसे भी अंधेरे से भरी है ….। लेकिन सरकारी सिस्टम में जिनके हाथों में उजाले की बागडोर है, वे भी संवेदनहीन होकर उनके साथ ऐसा सलूक कर रहे हैं कि नेत्रहीन दिव्यांगों के सामने अंधेरा और गहरा गया है।

यह दर्द भरी कहानी बिलासपुर के उन दृष्टिबाधित दिव्यांग छात्रों की है, जिन्होंने उच्च शिक्षा की उम्मीद में अपने गांव से आकर कॉलेज में दाखिला लिया है। कुदरत ने उनके हिस्से की रोशनी पहले ही छीन ली है और अब सरकारी सिस्टम उन्हें शिक्षा की रोशनी से दूर कर रहा है।बिलासपुर में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे दृष्टिबाधित (दिव्यांग) छात्रों को छात्रावास की सुविधा उपलब्ध न होने के कारण गंभीर शैक्षणिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ये छात्र शासकीय जे.पी. वर्मा स्नातकोत्तर कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में अध्ययनरत हैं।

छात्रों ने समाज कल्याण विभाग और कलेक्टर कार्यालय को कई बार आवेदन दिए हैं, जिसमें राजा साहू, ओमप्रकाश साहू, हरीश साहू, रामऊराम जगत और घनश्याम निराला सहित लगभग आठ छात्र शामिल हैं।छात्रों ने बताया है कि वे ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं और वर्तमान में उनके पास बिलासपुर में रहने के लिए कोई कमरा या छात्रावास की सुविधा नहीं है।आवास के अभाव के कारण उन्हें दैनंदिन व्याख्यान में भाग लेने में कठिनाई हो रही है, जिससे उनकी पढ़ाई नियमित रूप से बाधित हो रही है।छात्रों ने चिंता व्यक्त की है कि यदि वे नियमित कक्षाओं में 75 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज नहीं कराते हैं, तो वे परीक्षाओं में बैठने से वंचित रह सकते हैं।

छात्रों के अनुसार, कॉलेज उनके निवास स्थान से अत्यधिक दूरी पर स्थित है, और उन्हें प्रतिदिन आने-जाने के लिए तीन से चार घंटे की यात्रा करनी पड़ती है, जो संभव नहीं हो पा रहा है।

पूर्व में छात्रों को आवास की व्यवस्था करने में निराशा हाथ लगी। एक आवेदन में उल्लेख किया गया है कि नगर निगम ने शुरू में जो कमरा प्रदान किया था, वह एक ग्रामीण क्षेत्र में था जहां स्थानीय लोग उनकी विकलांगता का मजाक उड़ाते थे। एक दुखद घटना में, एक शराबी व्यक्ति उनके कमरे में आया और एक छात्र, रमऊ राम जगत, को थप्पड़ मारकर उसका बटुआ छीन लिया, जिसके बाद छात्रों को वह स्थान तुरंत छोड़ना पड़ा।

इसके अलावा, छात्रों ने 4 सितंबर 2024 को संयुक्त संचालक को लिखे पत्र में बताया कि उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ न होने के कारण वे ‘छात्र गृह योजना’ के तहत किराए के मकान में लगने वाले बिजली बिल, पंखा, बिस्तर तथा भोजन पकाने के उपकरण जैसी आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी करने में असमर्थ हैं।

दृष्टिबाधित दिव्यांग अपनी समस्या को लेकर आवेदन पर आवेदन दिए जा रहे हैं।संवेदनहीन सरकारी सिस्टम भी अपनी तरफ से चिट्ठी पर चिट्ठी लिखे जा रहा है। लेकिन दिव्यांगो की समस्या जस की तस है।कलेक्टर ने 20 अगस्त 2024 को संचालक, समाज कल्याण निदेशालय को पत्र लिखकर जिले में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों हेतु छात्रावास की व्यवस्था करने का प्रस्ताव दिया।शासकीय जे.पी. वर्मा कॉलेज के प्राचार्य ने भी 27 अगस्त 2024 को विभाग से छात्रों के लिए छात्रावास व्यवस्था उपलब्ध कराने का अनुरोध किया ताकि उनका अध्ययन कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सके। संयुक्त संचालक, समाज कल्याण विभाग की ओर से 14 अगस्त 2024 को छात्रों को सूचित किया गया कि समाज कल्याण विभाग की योजना ‘अटल संबल’ के अंतर्गत ‘उच्च शिक्षा प्रोत्साहन राशि योजना’ के तहत किराए पर आवास प्रदान करने का प्रावधान है, जिसमें अधिकतम 5,000 रुपए तक की मासिक राशि दी जाती है। हालांकि, उच्च शिक्षा विभाग ने 12 मई 2022 को जारी एक पत्र में यह स्पष्ट किया था कि विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में दृष्टिबाधित दिव्यांगों को प्रवेश की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

24 अक्टूबर 2024 को मुख्यमंत्री को लिखे अपने आवेदन में छात्रों ने अपील की है कि उनके अध्ययन कार्य सुचारू रूप से जारी रखने के लिए जल्द से जल्द आवास एवं भोजन की व्यवस्था की जाए। वे विशेष रूप से अनुरोध कर रहे हैं कि उन्हें सब्जी मंडी रोड पर प्रस्तावित आश्रयदत्त कर्मशाला भवन के पास छात्रावास/आवास दिया जाए, ताकि वे अपने कॉलेज के पास रहकर निर्बाध रूप से अध्ययन कर सकें।

 

एक तरफ सरकार दिव्यांगों के लिए कई योजनाएं चला रही है। जिसके नाम भी बहुत सुंदर रखे जाते हैं। इसी तर्ज पर छत्तीसगढ़ में समाज कल्याण विभाग की तरफ से दिव्यांगों के लिए 2016 में ‘क्षितिज अपार संभावनाएं योजना’  की शुरुआत की गई थी। इस योजना के तहत छात्र गृह योजना चलाई गई। जिसमें दिव्यांग छात्र, उच्च शिक्षा और सिविल सेवा की तैयारी करने के लिए बड़े शहरों में जा सकते हैं । लेकिन यह योजना कागजों पर ही नजर आती है। बिलासपुर के इन दृष्टिहीन छात्रों की यह कहानी खुद बयान कर रही है कि जरूरतमंद लोगों को इस योजना का कितना लाभ मिल पा रहा है। सवाल यह भी है कि क्या बढ़िया सा नाम रख देने भर से काम भी बढ़िया हो जाता है…. ?