शिक्षक कल्याण कोष/बिहार के सरकारी शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार और बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने खुशियों की एक और सौगात दी है। हाल ही में मनचाहे तबादले (ट्रांसफर) के नियमों को सरल बनाने के बाद, अब सरकार ने शिक्षकों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता राशि में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। बिहार बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. त्यागराजन एसएम की अध्यक्षता में आयोजित ‘शिक्षक कल्याण कोष उप समिति’ की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई है, जिससे राज्य के हजारों माध्यमिक शिक्षकों और कर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी।

बोर्ड द्वारा लिए गए फैसले के अनुसार, चिकित्सा सहायता की अलग-अलग श्रेणियों में दी जाने वाली राशि में 5 हजार से लेकर 10 हजार रुपये तक का इजाफा किया गया है।

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अब कैंसर, ब्रेन हैमरेज, हृदय रोग और किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जानलेवा और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कर्मचारियों को पहले मिलने वाले 35 हजार रुपये के स्थान पर 45 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। इसी तरह, छोटी सर्जरी (लघु शल्य चिकित्सा) या किसी दुर्घटना की स्थिति में मिलने वाली सहायता राशि को 20 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। अन्य सामान्य बीमारियों के इलाज के लिए भी अब 12 हजार के बजाय 17 हजार रुपये की आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी।

गौरतलब है कि यह सहायता राशि ‘शिक्षक कल्याण कोष’ के माध्यम से दी जाती है। इस कोष का प्रबंधन एक विशेष उप-समिति करती है, जिसमें बोर्ड के सचिव, वित्त पदाधिकारी और संयुक्त सचिव के साथ-साथ ‘बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ’ एवं ‘बिहार प्रादेशिक माध्यमिक शिक्षक-शिक्षकेतर कर्मचारी महासंघ’ के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होते हैं।

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यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि सहायता का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे। चिकित्सा मदद प्राप्त करने के लिए आवेदन की प्रक्रिया भी स्पष्ट है; इसके लिए संबंधित प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) और मान्यता प्राप्त शिक्षक संघ की अनुशंसा अनिवार्य होती है, जिसके बाद बोर्ड द्वारा राशि स्वीकृत की जाती है।

इस कल्याण कोष की सबसे खास बात यह है कि यह स्वयं शिक्षकों के सहयोग से संचालित होता है। माध्यमिक परीक्षा के मूल्यांकन (कॉपी चेकिंग) कार्य में लगे शिक्षकों को मिलने वाले पारिश्रमिक से तीन प्रतिशत की कटौती की जाती है, जो इस शिक्षक कल्याण कोष में जमा होती है। इसी जमा पूंजी का उपयोग शिक्षकों और उनके सहयोगियों को मुश्किल समय में चिकित्सा सहायता देने के लिए किया जाता है।

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