JD के TET आदेश पर भड़के शिक्षक: केदार जैन ने जारी किया वीडियो संदेश; बोले-80 हजार शिक्षकों का भविष्य खतरे में, अब आंदोलन ही एकमात्र रास्ता
छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में पदोन्नति और टीईटी (TET) की अनिवार्यता को लेकर छिड़ा विवाद अब और गहरा गया है। बस्तर संभाग से शुरू हुई विभागीय जांच ने प्रदेश के हजारों शिक्षकों की चिंता बढ़ा दी है, जिसके विरोध में अब शिक्षक संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया

रायपुर।बस्तर संभाग के संयुक्त संचालक (JD) शिक्षा द्वारा 8 अप्रैल 2026 को जारी किए गए एक आदेश ने छत्तीसगढ़ के शिक्षा जगत में खलबली मचा दी है। इस आदेश में पदोन्नत प्रधान पाठकों से उनकी टीईटी (TET) योग्यता की जानकारी मांगी गई है।
इस कदम का छत्तीसगढ़ संयुक्त शिक्षक संघ ने पुरजोर विरोध शुरू कर दिया है। संघ के प्रांताध्यक्ष केदार जैन ने एक वीडियो जारी कर इसे शिक्षकों की सेवा सुरक्षा पर बड़ा खतरा बताया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी मुश्किलें
केदार जैन ने अपने संबोधन में कहा कि 1 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद से ही छत्तीसगढ़ के लगभग 80 हजार शिक्षक जो टीईटी से प्रभावित हैं, उनका भविष्य अधर में लटका हुआ है। अब जेडी बस्तर द्वारा पदोन्नत शिक्षकों की टीईटी जानकारी मांगना इस डर को पुख्ता कर रहा है कि विभाग भविष्य में कड़े कदम उठा सकता है।
“अगला कदम सेवा समाप्ति भी हो सकता है”
शिक्षक नेता केदार जैन ने आशंका जताते हुए कहा कि अभी यह आदेश केवल बस्तर संभाग में लागू हुआ है, लेकिन जल्द ही यह पूरे प्रदेश में फैल सकता है। उन्होंने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा:
- टीईटी की जानकारी मांगने के पीछे मंशा पदोन्नति को रोकने की हो सकती है।
- भविष्य में बिना टीईटी वाले शिक्षकों की सेवा समाप्ति का आदेश भी जारी किया जा सकता है।
- यह अनुभवी शिक्षकों के वर्षों के योगदान को दरकिनार करने जैसा है।
अप्रैल अंत में प्रदेशव्यापी प्रदर्शन की तैयारी
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक पहले ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी आवाज बुलंद कर चुके हैं। केदार जैन ने घोषणा की है कि इस विषय को लेकर अप्रैल माह के अंत में छत्तीसगढ़ में एक विशाल प्रदर्शन किया जाएगा।
उन्होंने प्रदेश के सभी शिक्षक संगठनों से अपील की है कि वे आपसी मतभेद भुलाकर एक बैनर तले एकजुट हों, ताकि शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।




