रायपुर। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सेवाकालीन शिक्षकों को टीईटी अर्हता प्राप्त करने हेतु समय-सीमा 31 अगस्त 2028 तक बढ़ाए जाने के पश्चात राज्य में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आयोजन को लेकर शिक्षकों में गतिविधियां तेज हो गई हैं।

इसी क्रम में संजय शर्मा प्रदेश संयोजक छत्तीसगढ़ शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने कहा है कि शिक्षक नई शिक्षक की सेवा प्राप्त करने के लिए टीईटी परीक्षा नहीं दिला रहे है बल्कि शिक्षक पहले से सेवारत हैं, उन्हें अत्यधिक दक्ष, योग्य बनाए जाने की दृष्टि से शिक्षक पात्रता परीक्षा योजना में शामिल होना है।

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इसके लिए शिक्षकों की विभागीय शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित किये जाने की स्पष्ट चर्चा  शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बैठक बुलाकर किया हुआ है और प्रदेश के शिक्षकों को शिक्षा मंत्री के साथ हुई चर्चा पर पूर्ण भरोसा है, शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियों ने शिक्षामंत्री के समक्ष रखी पांच सूत्रीय मांग- टेट के झमेले से स्थायी मुक्ति, पूर्व सेवा गणना कर हित लाभ, केंद्रीय वेतनमान प्रदाय कर वेतन विसंगति दूर करने, डीएड धारी शिक्षकों को बीएड कराने हेतु ब्रिज कोर्स की व्यवस्था तथा भर्ती पदोन्नति नियम 2026 को निरस्त /संशोधन करने की मांग रखी थी, जिसमे सभी विषय पर सकारात्मक चर्चा हुआ।

संघर्ष मोर्चा के प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, वीरेंद्र दुबे, केदार जैन ने वर्तमान संदर्भ में विभागीय परीक्षा के विषय आने पर कहा है कि शिक्षकों को योग्य और दक्ष बनाए जाने का कार्य नियमित रूप से विभाग द्वारा प्रशिक्षण, व्यवहारिक ज्ञान और अन्य माध्यम से लगातार किया जाता है अब क्योंकि टेट पर न्यायिक व वैधानिक विषय आ जाने के बाद शिक्षकों को टेट परीक्षा उत्तीर्ण करना है।

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17 अगस्त 2012 तक छत्तीसगढ़ में टेट की आवश्यकता ही नही थी, अतः इस विषय पर छत्तीसगढ़ की सरकार विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज सकती है, हमारा मानना है कि इस पर जरूर विचार होगा।

उन्होंने बताया कि शिक्षक छत्तीसगढ़ सरकार के कर्मचारी हैं राज्य शासन के कर्मचारियों के लिए वेतन संरचना से लेकर नियम, नीति, निर्देश स्पष्ट रूप से स्थानीय आधार पर पूर्व से ही प्रचलित है ऐसी स्थिति में एनसीटीई से पत्राचार करते हुए छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा अपने कर्मचारियों की टेट परीक्षा लिया जा सकता है।

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अनुभवी व सेवारत शिक्षकों को दक्ष किया जा सकता है और न्यायिक और वैधानिक निर्देशों की प्रतिपूर्ति की जा सकती है, इस संबंध में एक विस्तृत सुझाव पूर्व में ही शिक्षा विभाग को दिया जा चुका है, माननीय शिक्षा मंत्री जी से चर्चा के दिवस भी इस विषय का सुझाव दिया गया है, यह विषय शिक्षकों के हित में है।

चर्चा के दौरान विभागीय टीईटी परीक्षा के शीघ्र आयोजन, सेवाकालीन शिक्षकों को पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराने तथा परीक्षा प्रक्रिया को सरल एवं समयबद्ध बनाए जाने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ है।

प्रदेश संयोजक संजय शर्मा, सुधीर प्रधान, वाजिद खान, देवनाथ साहू, प्रवीण श्रीवास्तव, शैलेन्द्र यदु, संजय उपाध्याय, डॉ कोमल वैष्णव, मुकेश मुदलियार, मनोज सनाढ्य, शैलेन्द्र पारिक ने कहा है अपरिहार्य स्थिति में अनुभवी व सेवाकालीन शिक्षकों (इन सर्विस टीचर्स) की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पृथक विभागीय सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करने पर भी गंभीरता से विचार किया जाए, साथ ही टीईटी परीक्षा का वार्षिक कैलेंडर जारी कर नियमित अंतराल पर परीक्षा आयोजित की जाए, जिससे शिक्षकों को समय पर पात्रता प्राप्त करने का अवसर मिल सके।

निम्नानुसार सुझाव प्रस्तुत किया गया हैं—

1.  सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप राज्य में कार्यरत शिक्षकों के लिए पृथक“विभागीय सीमित शिक्षक पात्रता परीक्षा”।शीघ्र आयोजित की जाए।

2. टीईटी परीक्षा का वार्षिक कैलेंडर जारी कर नियमित अंतराल पर परीक्षा आयोजित की जाए।

3. शिक्षकों को पर्याप्त अवसर प्रदान करने हेतु वर्ष में कम से कम तीन बार टीईटी परीक्षा आयोजित की जाए।

4. अनुभवी व इन-सर्विस शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए टीईटी परीक्षा प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध नाया जाए।

5. परीक्षा का पाठ्यक्रम व्यवहारिक एवं सेवा-अनुभव आधारित हो, जिससे शिक्षक सहज रूप से उत्तीर्ण हो सकें।

6. परीक्षा में न्यूनतम उत्तीर्णांक 33% रखा जाए, ताकि योग्य एवं अनुभवी शिक्षक अनावश्यक रूप से अपात्र न हों।

7. इस परीक्षा को पदोन्नति एवं सेवा नियमितीकरण से जोड़ा जाए, जिससे शिक्षकों को सेवा सुरक्षा का लाभ मिल सके।

8. परीक्षा प्रक्रिया सरल, पारदर्शी एवं विभागीय स्तर पर ही संचालित की जाए।

9. परीक्षा प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक दोनो स्तर हेतु आयोजित किया जाए।

10. परीक्षा केंद्र विकासखंड स्तर पर केवल शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों को बनाया जाए ।

शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजन हेतु निम्न प्रावधान निर्धारित करने प्रस्ताव प्रस्तुत है –

1- पेपर -l एवं पेपर -II आयोजित किए जाएं।

2- प्रश्न राज्य के कक्षा I–V तथा कक्षा VI–VIII के पाठ्यक्रम एवं सामान्य शैक्षणिक समझ एवं अवधारणाओं पर आधारित हों।

3- कक्षा l – V परीक्षा तथा कक्षा Vl – Vlll परीक्षा में कम से कम 15 दिन का अंतर रखा जावे।

4- शिक्षक पात्रता परीक्षा ऑफलाइन (OMR आधारित) आयोजित हों।

5- कुल 100 बहुविकल्पीय प्रश्न हों, प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का हो।

6- परीक्षा अवधि 3 घंटे निर्धारित हों।

7- चूंकि सेवाकालीन शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित होगी, अतः न्यूनतम उत्तीर्णांक 33/100 निर्धारित हों।

8- परीक्षा की तैयारी हेतु शिक्षकों को शीघ्र मॉडयुल उपलब्ध कराया जाए।