एजुकेशन सिटी की नींव पर सख्त नजर… समय-सीमा और गुणवत्ता पर कलेक्टर की दो टूक
“नींव से लेकर नल तक सख्ती… एजुकेशन सिटी और जल व्यवस्था पर प्रशासन का डबल एक्शन”

बिलासपुर…शहर के भविष्य की शैक्षणिक तस्वीर गढ़ने वाले एजुकेशन सिटी प्रोजेक्ट की जमीन पर अब प्रशासन ने रफ्तार और गुणवत्ता—दोनों पर सख्त निगरानी शुरू कर दी है। दयालबंद के मधुबन क्षेत्र में निर्माणाधीन नालंदा परिसर और एकेडमिक ब्लॉक का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने साफ संकेत दिया कि काम में देरी या गुणवत्ता से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं होगा।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने निर्माण एजेंसी और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बारिश से पहले फाउंडेशन का काम हर हाल में पूरा किया जाए, ताकि मौसम के कारण प्रोजेक्ट प्रभावित न हो। उन्होंने निर्माण कार्य की समय-सीमा तय रखते हुए गुणवत्ता को प्राथमिकता देने पर जोर दिया और पूरे परिसर का बारीकी से मुआयना करते हुए प्रवेश मार्ग को व्यवस्थित करने तथा सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा।
एजुकेशन सिटी के इस पहले चरण में करीब 15 करोड़ रुपये की लागत से एकेडमिक ब्लॉक और 11 करोड़ 42 लाख रुपये की लागत से नालंदा परिसर तैयार किया जा रहा है। प्रशासन की मंशा स्पष्ट है—यह प्रोजेक्ट सिर्फ इमारत नहीं, बल्कि शहर के शैक्षणिक ढांचे का मजबूत आधार बने। दूसरे चरण में इस पूरे क्षेत्र को और विस्तार देने की योजना है।
इधर, नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने शहर की जल व्यवस्थाओं पर फोकस करते हुए बिरकोना स्थित अमृत मिशन योजना के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण किया। उन्होंने पानी की गुणवत्ता को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताई और खुद पानी पीकर उसकी गुणवत्ता जांची। साफ निर्देश दिए गए कि नागरिकों तक पहुंचने वाला पानी हर हाल में शुद्ध और सुरक्षित होना चाहिए।
कमिश्नर ने बहतराई और चांटीडीह में जल आवर्धन योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्यों का भी जायजा लिया और समयबद्ध प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।





