चोरी का सोना, फाइनेंस में खेल… कंगन गलाकर सबूत मिटाने की साजिश बेनकाब..कप्तान ने क्या कहा
कंगन से कर्ज तक का खेल… चोरी का सोना गलाकर ‘क्लीन’ करने की साजिश का पर्दाफाश

बिलासपुर…शहर में चोरी की एक वारदात ने जांच के दौरान ऐसा मोड़ लिया, जिसने न सिर्फ चोरों की चाल उजागर की बल्कि फाइनेंस सिस्टम की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। घर से चोरी हुए सोने के कंगन सीधे फाइनेंस कंपनी तक पहुंचे और फिर उन्हें गलाकर ठिकाने लगाने की कोशिश—पुलिस ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
सिविल लाइन थाना क्षेत्र के राजेन्द्र नगर निवासी प्रशांत कुमार मिश्रा ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 2 जून 2025 को उनकी माता के चार सोने के कंगन (करीब 40 ग्राम) और 1 लाख रुपये नगद घर की आलमारी का ताला तोड़कर चोरी कर लिए गए। मामला दर्ज होते ही पुलिस ने जांच शुरू की और तकनीकी व स्थानीय स्तर पर पड़ताल तेज की।
विवेचना के दौरान संदेह के आधार पर दीपक पटेल (19 वर्ष) को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। शुरू में टालमटोल के बाद उसने चोरी की वारदात स्वीकार कर ली और बताया कि साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया गया था। इसके बाद जो खुलासा हुआ, उसने मामले को और गंभीर बना दिया—चोरी किए गए कंगनों को मणप्पुरम फाइनेंस में गिरवी रखकर लोन लिया गया था।
पुलिस जब इस कड़ी तक पहुंची तो जांच ने नया मोड़ लिया। सामने आया कि फाइनेंस कंपनी के मैनेजर आजम बेग को कंगनों के चोरी के होने की जानकारी थी, इसके बावजूद उन्हें गलाकर सबूत मिटाने का प्रयास किया गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गला हुआ करीब 40 ग्राम सोना बरामद कर लिया, जिसकी कीमत लगभग 5 लाख रुपये आंकी गई है।
पूरे मामले में पुलिस कप्तान रजनेश सिंह ने सख्त रुख दिखाते हुए कहा कि “अपराध केवल वारदात तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके बाद चोरी के माल को खपाने वाले नेटवर्क पर भी कार्रवाई जरूरी है। इस मामले में जिस तरह फाइनेंस स्तर पर लापरवाही और संलिप्तता सामने आई है, वह गंभीर है। ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि जिले में संपत्ति संबंधी अपराधों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और ऐसे नेटवर्क को तोड़ना प्राथमिकता है, ताकि चोरी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को 14 अप्रैल को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। मामले में अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है और जांच इस दिशा में भी बढ़ रही है कि कहीं इस तरह का कोई बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है।





