बूंदों से लिखा जा रहा भविष्य… ‘मोर गांव-मोर पानी’ बना जल क्रांति का आधार
सूखी जमीन से उठी उम्मीद… ‘मोर गांव-मोर पानी’ ने बदली जल की तस्वीर

बिलासपुर..पानी की हर बूंद अब सिर्फ जरूरत नहीं, भविष्य की सुरक्षा बनती जा रही है। बिलासपुर में “मोर गांव-मोर पानी” अभियान ने जल संरक्षण को सरकारी योजना से आगे बढ़ाकर जनभागीदारी का आंदोलन बना दिया है, जहां गांव खुद अपने जल भविष्य को संवारने में जुटे नजर आ रहे हैं।
सरकार के निर्देश, जिले में व्यापक अभियान
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर जिले में जल संरक्षण और संवर्धन को लेकर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। कलेक्टर संजय अग्रवाल और जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल के मार्गदर्शन में सभी विभागों, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवी संस्थाओं के सहयोग से ठोस कार्ययोजना तैयार की गई।
486 ग्राम पंचायतों तक पहुंचा अभियान
“मोर गांव-मोर पानी” महाअभियान के तहत जनपद और क्लस्टर स्तर पर कर्मचारियों व जल मित्रों ने जिले की 486 ग्राम पंचायतों में पहुंचकर लोगों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया। यह पहल सिर्फ प्रचार तक सीमित नहीं रही—गांवों में सीधे काम दिखा।
श्रमदान से बदली तस्वीर—हजारों संरचनाएं तैयार
अभियान के दौरान ग्रामीणों की भागीदारी से 55,567 सोक पिट बनाए गए। 190 बोरी बंधान कार्य नालों में किए गए। 163 सैंड फिल्टर स्ट्रक्चर अनुपयोगी बोरवेल में तैयार हुए। 41 इंजेक्शन वेल परकोलेशन टैंकों में बनाए गए। यह आंकड़े बताते हैं कि अभियान जमीनी स्तर पर कितनी तेजी से आगे बढ़ा।
जल स्तर बढ़ेगा, खेती को मिलेगा सहारा
इन प्रयासों का सीधा असर भू-जल स्तर पर पड़ेगा।
गर्मी में भी हैंडपंप और कुओं में पानी बना रहेगा, जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा और फसल उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ेगा।
संचयन, संरक्षण और जागरूकता
सोक पिट और सैंड फिल्टर से वर्षा जल का बेहतर संचयन होगा, जिससे पानी की बर्बादी रुकेगी। नालों में बंधान कार्य से जल प्रवाह नियंत्रित होगा और मिट्टी का कटाव कम होगा। सबसे अहम—गांवों में जल के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ी है।
जनभागीदारी से मजबूत हुई व्यवस्था
इस अभियान ने साबित किया कि जब समुदाय खुद आगे आता है, तो योजनाएं टिकाऊ बनती हैं। गांवों में अब जल प्रबंधन की मजबूत नींव तैयार हो रही है, जो आने वाले वर्षों में जल संकट से निपटने में कारगर साबित होगी।





