जग्गी हत्याकांड में अंतिम मोड़ से पहले सख्त रुख—अमित जोगी को समय देने से हाईकोर्ट का इंकार
अब नहीं चलेगी देरी: जग्गी मर्डर केस में HC का कड़ा रुख, समय मांग खारिज

बिलासपुर …बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर आ खड़ा हुआ है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ संकेत दिए कि अब देरी की कोई गुंजाइश नहीं बची है।
सुनवाई के दौरान अमित जोगी की ओर से अतिरिक्त समय की मांग रखी गई, लेकिन कोर्ट ने इस आग्रह को सीधे खारिज कर दिया। डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि मामले की सुनवाई अब अंतिम चरण में है और अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
दो दशक पुराना मामला, अब आखिरी दहलीज पर
साल 2003 में बिलासपुर में हुए इस सनसनीखेज हत्याकांड में राम अवतार जग्गी को दिनदहाड़े गोली मार दी गई थी। इस मामले ने उस वक्त पूरे प्रदेश की राजनीति और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे।
जांच और ट्रायल के बाद साल 2007 में निचली अदालत ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि अमित जोगी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था। इसी फैसले को लेकर मामला हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में विचाराधीन है।
कोर्ट का साफ संदेश—अब फैसला दूर नहीं
मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच में चल रही इस सुनवाई के दौरान कोर्ट का रुख स्पष्ट और सख्त नजर आया। समय देने से इनकार करते हुए अदालत ने संकेत दिया कि अब बहस को अंतिम रूप देकर जल्द ही फैसला सुनाया जा सकता है।
कल होगी अंतिम सुनवाई
मामले की अगली और संभावित रूप से अंतिम सुनवाई अब कल तय की गई है। ऐसे में दो दशक पुराने इस हाई-प्रोफाइल केस पर एक बार फिर पूरे प्रदेश की निगाहें टिक गई हैं—यह फैसला न सिर्फ कानूनी, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है।





