बिलासपुर…तामेश्वरनगर–आरागाही हवाई पट्टी मार्ग के डामरीकरण कार्य के लिए डंप की गई सरकारी निर्माण सामग्री के कथित दुरुपयोग ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। सड़क निर्माण के लिए रखी गई चिप्स, गिट्टी और डामर के निजी उपयोग और कथित बिक्री के आरोपों से लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। युवा कांग्रेस नेता नरेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया के जरिए पूरे मामले को उठाते हुए उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि जिस सामग्री से क्षेत्र की बदहाल सड़कें दुरुस्त होनी थीं, वही सामग्री जेसीबी और ट्रैक्टरों के जरिए गांवों में पहुंचाई जा रही है। लोगों का दावा है कि लगभग 150 से 200 ट्रैक्टर निर्माण सामग्री विभिन्न स्थानों तक पहुंचाई गई और प्रत्येक ट्रैक्टर 1500 से 2000 रुपये में बेचा गया। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय कर्मचारियों ने बताया था कि यह सामग्री भवरमाल डीएवी स्कूल मार्ग, आरागाही, केरवाशीला और रामानुजगंज मार्ग के बड़े-बड़े गड्ढों की मरम्मत में उपयोग होगी। लेकिन हकीकत यह है कि सड़क आज भी गड्ढों से अटी पड़ी है, जबकि सामग्री के दूसरे स्थानों पर खपाए जाने की चर्चाएं लगातार हो रही हैं।

मामले को और गंभीर बनाते हुए ग्रामीणों ने कुछ जनप्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो पूरे नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस मार्ग से प्रतिदिन हजारों विद्यार्थी स्कूल बस, साइकिल और पैदल गुजरते हैं, वहीं किसान, मरीज और आम नागरिक भी जान जोखिम में डालकर सफर करने को मजबूर हैं। सड़क पर गहरे गड्ढे दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं, लेकिन मरम्मत के बजाय निर्माण सामग्री के कथित दुरुपयोग की चर्चा अधिक हो रही है।

ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि रविवार रात जेसीबी और ट्रैक्टरों से चिप्स, गिट्टी और डामर हटाए जाने की गतिविधियां देखी गईं। हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

युवा कांग्रेस नेता नरेंद्र सिंह ने कहा कि यदि सरकारी निर्माण सामग्री का दुरुपयोग हुआ है तो यह केवल सरकारी संपत्ति की चोरी नहीं, बल्कि जनता के टैक्स के पैसे और विकास कार्यों के साथ सीधा खिलवाड़ है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सड़क निर्माण की सामग्री सुरक्षित है तो सड़क आज भी गड्ढों में क्यों है, और यदि सामग्री गायब है तो उसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है? अब पूरे मामले की सच्चाई प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आएगी।