पत्रकारिता की नब्ज पर संगोष्ठी— वरिष्ठ पत्रकार ज्ञान अवस्थी का 75वां जन्मोत्सव ऐतिहासिक अंदाज़ में मनाया गया.. पढ़े दिग्गजों ने क्या कहा

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार ज्ञान अवस्थी के 75 वें जन्म दिवस पर सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। साथ ही पत्रकारिताः सामाजिक सरोकार और राजनीति विषय पर संगोष्ठी भी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता लेखक एवं पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. सुशील त्रिवेदी थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय बिलासपुर के कुलपति आचार्य ए.डी.एन. वाजपेयी कर रहे थे। विशिष्ट अतिथि के रूप में तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह और सामाजिक कार्यकर्ता- अधिवक्ता निरुपमा वाजपेई की उपस्थिति रही। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार ज्ञान अवस्थी के 75 साल के जीवन पर लिखी गई पुस्तक “75 पन्नों की खुली किताब” का भी विमोचन किया गया।
भारतीय पत्रकारिता के इतिहास पर विचार
बिलासपुर सिंचाई विभाग के परिसर स्थित प्रार्थना सभा भवन में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत में वरिष्ठ पत्रकार नथमल शर्मा ने संगोष्ठी के विषय का प्रवर्तन किया। संगोष्ठी में प्रमुख वक्ता डॉ. सुशील त्रिवेदी ने आजादी की लड़ाई में पत्रकारों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस आंदोलन में हिस्सा लेने वाले प्रमुख नेता खुद भी पत्रकार थे। उन्होंने माधवराव सप्रे का जिक्र करते हुए छत्तीसगढ़ मित्र के प्रकाशन और उससे जुड़े कई तथ्य सामने रखे। उन्होंने इस ओर इशारा किया कि भारतीय पत्रकारिता का समृद्धशाली इतिहास रहा है।आजादी के बाद भी पत्रकारों ने देश के नवनिर्माण में अपनी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने वर्तमान संदर्भ में समाचार जगत और पत्रकारों की भूमिका को लेकर भी अपनी बातें रखी। डॉ. त्रिवेदी ने कहा कि विश्वसनीयता ही पत्रकारिता की सबसे अमूल्य निधि है। इसे बचाए रखने की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी पर है ।
पत्रकारों की भूमिका और चुनौतियों पर मंथन
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य ए.डी.एन. वाजपेयी ने भी भारत की आजादी और देश के नवनिर्माण में पत्रकारों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि आज पत्रकारों के सामने कई चुनौतियां हैं। समाज पत्रकारों से हमेशा ही मार्गदर्शन की अपेक्षा करता है। ये अपेक्षाएं भी पूरी हो ऐसा प्रयास वर्तमान पीढ़ी के पत्रकारों को करना चाहिए ।
ज्ञान अवस्थी के योगदान को किया याद
तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह ने छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता में ज्ञान अवस्थी के योगदान और उनसे जुड़े कई संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसे पत्रकारों की जरूरत हमेशा रही है जो बिना किसी से समझौता किये साहस के साथ समाज के पक्ष में अपनी बात रख सके। सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता निरुपमा वाजपेयी ने अपने संबोधन में रेलवे जोन आंदोलन के दौरान ज्ञान अवस्थी की भूमिका को याद किया। उन्होंने भी कहा कि समाज को दिशा देने में पत्रकार जगत की भूमिका हमेशा प्रासंगिक रहेगी।
प्रबुद्ध जनों की बड़ी उपस्थिति
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार रुद्र अवस्थी ने किया और आभार प्रदर्शन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. शिव दुलारे मिश्र स्मृति संस्थान के शिव मिश्रा ने किया । कार्यक्रम में एस. के. तिवारी, वरिष्ठ पत्रकार सतीश जायसवाल, पीयूष कांति मुखर्जी, प्रवीण शुक्ला, राजेश अग्रवाल, निर्मल माणिक ,राजेश दुआ ,वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आर ए शर्मा, डॉ गिरीश पांडे, पूर्व कुलपति एम.ए.. खोखर, डॉ. सरोज मिश्रा, आर.के. सक्सेना ,रायपुर से सुरेश मिश्रा, भाजपा नेता संतोष कौशिक, चंद्र प्रकाश वाजपेयी, कांग्रेस प्रवक्ता अभय नारायण राय, द्वारिका प्रसाद अग्रवाल,अरविंद दीक्षित,प्रभात मिश्रा,राजीव नयन शर्मा, किशोर सिंह, आशीष शुक्ला, मनीष शुक्ला सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध जन शामिल हुए।
आयोजन ने छोड़ी अमिट छाप
यह आयोजन CGWALL की ओर से किया गया और बिलासपुर की पत्रकारिता में एक अमिट छाप छोड़ दी। सिंचाई विभाग का प्रार्थना सभा भवन इस विशेष अवसर का गवाह बना, जब वरिष्ठ पत्रकार ज्ञान अवस्थी के 75वें जन्म दिवस पर न केवल संगोष्ठी हुई बल्कि उनके जीवन और विचारों से जुड़ा एक विशेष उपहार भी सामने आया।
‘75 पन्नों की खुली किताब’ ने छुआ दिल
इस मौके पर रुद्र अवस्थी की ओर से ज्ञान अवस्थी का लिया गया विस्तृत इंटरव्यू “75 पन्नों की खुली किताब” का रूप लेकर उपस्थित हुआ। किसी ने कभी सोचा नहीं था कि एक इंटरव्यू भी किताब के रूप में भी सामने आ सकता है।
इतिहास और वर्तमान को जोड़ने वाला अवसर
छत्तीसगढ़ की पत्रकारिता की मिट्टी में जन्मे और बिलासपुर की पत्रकारिता की धारा को दशकों तक सींचने वाले वरिष्ठ पत्रकार एवं बिलासपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष ज्ञान अवस्थी के 75वें जन्मदिवस पर विशेष संगोष्ठी का यह आयोजन सिर्फ उनका जन्म मनाना बस नहीं था, बल्कि पत्रकारिता के इतिहास और वर्तमान को जोड़ने वाली एक जीवन्त कड़ी को याद करने का दिन भी साबित हुआ।
पत्रकारिता की धार,सामाजिक सरोकार पर विमर्श
कार्यक्रम का विषय ‘पत्रकारिता, सामाजिक सरोकार और राजनीति’ रखा गया। वक्ताओं ने इसे महज एक विषय न मानकर समाज की नब्ज टटोलने वाली पत्रकारिता का आईना बताया। चर्चा के दौरान कहा गया कि पत्रकारिता की असली पहचान तभी कायम रह सकती है जब वह सामाजिक सरोकार से जुड़ी रहे..। इस मौके पर यह भी विचार सामने आया कि कलम धारदार होनी चाहिए, लेकिन अनियंत्रित नही और यह नियंत्रण भीतर से आता है। बदलते पत्रकारिता के आयामों के बीच पत्रकारों को जिम्मेदारी और विवेक के साथ अपनी भूमिका निभाने की सलाह दी गई..।
ज्ञान अवस्थी — आंदोलन की धड़कन
संगोष्ठी का केन्द्र ज्ञान अवस्थी का जीवन और उनका पत्रकारिता सफर रहा। कार्यक्रम की शुरुआत में उनके उल्लेखनीय योगदानों को याद करते हुए विशेषकर बिलासपुर में रेलवे जोन की स्थापना के आंदोलन में उनकी अग्रणी भूमिका को याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि ज्ञान अवस्थी केवल कलम के साधक नहीं बल्कि आंदोलन की धड़कन भी रहे हैं।
सम्मान और भावनाओं से भरा क्षण
कार्यक्रम में जब वरिष्ठ पत्रकार ज्ञान अवस्थी मंच पर आए, तो उन्होंने विनम्रता से सबका आभार व्यक्त किया। वे इस आयोजन से अभिभूत थे। उनका सम्मान करने के लिए उनके साथियों से लेकर नई पीढ़ी तक उमड़ पड़ी ऐसा लगा मानो पूरी पत्रकारिता बिरादरी उनकी तपस्या को प्रणाम करने आई हो..।इस पूरे कार्यकम में सीजीवाल परिवार के संपादक डॉ. भास्कर मिश्र, रिपोर्टर साथी मनीष जायसवाल, मनीष अग्रवाल, शिक्षक फेडरेशन के अश्वनी कुर्रे का साथ रहा।





