Cg news।मुंगेली। दिवंगत सहायक शिक्षक की पत्नी को करीब चार साल तक पारिवारिक पेंशन और सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिलने के मामले में बिलासपुर हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।

जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच की सुनवाई के दौरान उठे सवालों के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने मामले में स्थानीय स्तर पर गंभीर लापरवाही मानते हुए छह अधिकारी-कर्मचारियों को निलंबित कर दिया।

वहीं, कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता राजेश्वरी त्रिपाठी को 90 प्रतिशत वास्तविक पेंशन स्वीकृत कर दी गई है।

मामला शासकीय हाई स्कूल लाखासार में पदस्थ सहायक शिक्षक अंजनी त्रिपाठी की मृत्यु से जुड़ा है। 25 सितंबर 2022 को सेवाकाल के दौरान उनका निधन हो गया था।

इसके बाद उनकी पत्नी राजेश्वरी त्रिपाठी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर पारिवारिक पेंशन, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण सहित अन्य सेवानिवृत्ति देयकों के भुगतान की मांग की थी। याचिका में करीब 2 लाख 9 हजार 13 रुपये की कथित गलत वसूली का मुद्दा भी उठाया गया था।

मामले में शासन की ओर से बताया गया था कि अधिक वेतन भुगतान से संबंधित स्थिति के कारण पेंशन प्रकरण लंबित था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाया कि यदि अधिक भुगतान की राशि को लेकर विवाद था, तो इसके चलते अन्य वैध सेवानिवृत्ति देयकों का भुगतान इतने लंबे समय तक क्यों रोका गया।

प्रकरण की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया था।

सचिव की मौजूदगी में राज्य शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि 23 सितंबर के आदेश के तहत राजेश्वरी त्रिपाठी को 90 प्रतिशत वास्तविक पेंशन स्वीकृत कर दी गई है।

साथ ही कोर्ट को जानकारी दी गई कि मामले में स्थानीय स्तर पर हुई लापरवाही के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने 25 सितंबर को छह अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है।

निलंबित किए गए कर्मचारियों में तत्कालीन प्रभारी प्राचार्य राघवेन्द्र कुमार सोनी, प्रभारी प्राचार्य रघुनंदन सिंह राजपूत, सहायक ग्रेड-3 मोतीराम यादव, सहायक ग्रेड-2 त्रिवेणी ध्रुव, सहायक ग्रेड-3 अशोक ध्रुव तथा जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पेंशन कक्ष प्रभारी एवं कनिष्ठ लेखा परीक्षक शत्रुघन कुलमित्र शामिल हैं।

मामले में सामने आया कि वर्ष 2018 में सहायक शिक्षक एलबी संवर्ग के संविलियन के बाद किए गए वेतन निर्धारण का समय पर सक्षम स्तर से अनुमोदन नहीं कराया गया था। इसके चलते बाद में अधिक भुगतान की वसूली से संबंधित स्थिति बनी।

इसके अलावा पेंशन प्रकरण के संबंध में उच्च कार्यालय को गलत जानकारी भेजे जाने की बात भी विभागीय कार्रवाई के आधार में सामने आई।

हाई कोर्ट ने शासन की ओर से प्रस्तुत की गई कार्रवाई को अभिलेख पर लिया। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव की व्यक्तिगत उपस्थिति से आगे के लिए छूट दे दी गई। मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की गई है। अब आगे की सुनवाई में पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े लंबित पहलुओं पर कोर्ट के निर्देश महत्वपूर्ण रहेंगे।