Cg highcourt।प्रधानमंत्री के वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान सुरक्षा ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के आरोप में सेवा से हटाए गए होमगार्ड जवान को बिलासपुर हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।

जस्टिस एके प्रसाद की सिंगल बेंच ने जवान की बर्खास्तगी का आदेश निरस्त करते हुए उसे सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कहा कि कारण बताओ नोटिस, आरोप पत्र और विभागीय जांच का अवसर दिए बिना सेवा से हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है।

जवान ने अपनी अनुपस्थिति की वजह बीमारी बताई थी और इसके समर्थन में अस्पताल के दस्तावेज भी प्रस्तुत किए थे। इस फैसले के बाद करीब 10 साल पुराने मामले में उसकी सरकारी सेवा में वापसी का रास्ता साफ हुआ है।

मामला कांकेर जिले के ग्राम कोड़ाभाट निवासी गजाधर कुमार नाग का है। वह छत्तीसगढ़ होमगार्ड में सैनिक के पद पर कार्यरत था।

प्रधानमंत्री के 28 अक्टूबर से 1 नवंबर 2016 तक रायपुर प्रवास के दौरान सुरक्षा ड्यूटी के लिए तैनात जवानों की सूची में उसका नाम भी शामिल था। आरोप था कि वह निर्धारित ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुआ। इसी आधार पर विभाग ने 24 नवंबर 2016 को अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए उसे सेवा से हटा दिया था।

बीमारी और अस्पताल में भर्ती होने के दस्तावेज किए थे पेश

गजाधर नाग ने हाईकोर्ट को बताया कि वह 26 अक्टूबर से 2 नवंबर 2016 तक बीमार था। मलेरिया और टाइफाइड होने के कारण उसे कांकेर के शासकीय कोमल देव जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अस्पताल के दस्तावेजों के अनुसार, उसे 26 अक्टूबर को भर्ती किया गया और 27 अक्टूबर को छुट्टी दे दी गई। स्वास्थ्य में सुधार के बाद 2 नवंबर को फिटनेस प्रमाणपत्र भी जारी किया गया था।

जवान का तर्क था कि बीमारी के कारण वह सुरक्षा ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हो सका, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने उसका पक्ष सुने बिना ही सेवा समाप्त कर दी।

विभागीय जांच नहीं कराने पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि जवान को होमगार्ड नियमों के तहत अपील का वैकल्पिक अधिकार उपलब्ध था।

हाईकोर्ट ने इस आपत्ति को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन करते हुए पाया कि जवान की ओर से बीमारी से संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे, लेकिन अधिकारियों ने न तो विभागीय जांच कराई, न कारण बताओ नोटिस जारी किया और न ही आरोप पत्र देकर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया।

अदालत ने यह भी पाया कि विभागीय जांच कराना संभव नहीं होने का कोई कारण रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया था।

बर्खास्तगी आदेश निरस्त, सेवा में बहाली के निर्देश

हाईकोर्ट ने 24 नवंबर 2016 को जारी बर्खास्तगी आदेश रद्द करते हुए अधिकारियों को गजाधर नाग को लागू सेवा नियमों के अधीन बहाल करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने उसकी अनुपस्थिति की अवधि पर चिकित्सा दस्तावेजों और संबंधित सेवा नियमों के अनुसार विचार करने को कहा है। इसके साथ ही पिछला वेतन और अन्य परिणामी लाभ भी लागू नियमों तथा कानूनी सिद्धांतों के अनुसार तय करने का निर्देश दिया गया है।