Gold silver price।राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सर्राफा बाजार में बुधवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई।

Gold silver price।सोने का भाव एक ही दिन में 4,800 रुपये बढ़कर 1.46 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमत में भी 9,000 रुपये प्रति किलोग्राम का उछाल आया। त्योहारों के दौरान घरेलू बाजार में बढ़ती मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में आई तेजी को इस उछाल की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।

ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत मंगलवार को 1,41,800 रुपये प्रति 10 ग्राम थी।

बुधवार को इसमें 4,800 रुपये की बढ़ोतरी हुई और भाव 1,46,600 रुपये प्रति 10 ग्राम (सभी करों सहित) पर पहुंच गया। इसी तरह चांदी का भाव पिछले सत्र के 1.84 लाख रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 1.93 लाख रुपये प्रति किलोग्राम हो गया।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के रिसर्च हेड राजीव शरण के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत रिकवरी और घरेलू स्तर पर त्योहारों के कारण बढ़ी मांग ने सोने की कीमतों को सहारा दिया है।

उनके अनुसार, अक्टूबर में अपने उच्चतम स्तर से सोने के भाव में करीब 8 प्रतिशत की गिरावट आई थी। हालिया तेजी को उन खरीदारों के लिए राहत के रूप में देखा जा सकता है, जो त्योहारी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं।

शरण ने सोने की कीमतों में पिछली गिरावट के पीछे मजबूत अमेरिकी डॉलर, बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम होने जैसे कारकों को जिम्मेदार बताया। इन परिस्थितियों में कारोबारियों ने मुनाफावसूली की थी।

उन्होंने यह भी बताया कि पिछले धनतेरस के मुकाबले इस बार पिछले त्योहारी सीजन के बाद से सोने की कीमतों में लगभग 5 से 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जबकि पिछले साल धनतेरस के आसपास सालाना आधार पर करीब 65 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी बुधवार को कीमती धातुओं में तेज उछाल देखा गया। स्पॉट गोल्ड 113.72 डॉलर यानी करीब 3 प्रतिशत बढ़कर 4,043.93 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया और फिर से 4,000 डॉलर के स्तर के पार निकल गया। वहीं, चांदी की कीमत 4.5 प्रतिशत बढ़कर 52.03 डॉलर प्रति औंस हो गई।

एलकेपी सिक्योरिटीज के कमोडिटी और करेंसी रिसर्च के अनुसार (Gold silver price) आगे सोने-चांदी की तेजी कितनी टिकाऊ रहती है, इस पर निवेशकों की नजर रहेगी। इसके लिए अमेरिकी डॉलर की चाल, बॉन्ड यील्ड और फेडरल रिजर्व के नीतिगत रुख को अहम संकेतक माना जा रहा है।