punjab congress/चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही अंदरूनी कलह खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक भूपेश बघेल की मध्यस्थता के बावजूद पार्टी के दिग्गज नेताओं के बीच मतभेद और गहरे होते नजर आ रहे हैं। शनिवार को चंडीगढ़ में हुई एक अहम बैठक के बाद नेताओं के बीच शुरू हुई जुबानी जंग ने यह साफ कर दिया है कि पंजाब इकाई में ‘सब कुछ ठीक नहीं है’।

punjab congress/वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा के एक तीखे बयान और उस पर प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की पलटवार ने पार्टी के भीतर मचे घमासान को सार्वजनिक कर दिया है।

मामला शनिवार को सीनियर कांग्रेस नेता राणा गुरजीत सिंह के आवास पर हुई 80 मिनट की लंबी बैठक से शुरू हुआ। इस बैठक में भूपेश बघेल के साथ पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा शामिल हुए, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए। बैठक के बाद रंधावा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कांग्रेस को आज ऐसे मजबूत नेतृत्व की जरूरत है जो अपनी बात दमदारी से रख सके, न कि किसी ‘समझौता करने वाले’ (Compromised) नेता की।

रंधावा की इस टिप्पणी के दौरान चरणजीत सिंह चन्नी उनके बगल में खड़े होकर सहमति जताते दिखे, जिसे सीधे तौर पर प्रदेश नेतृत्व पर हमले के रूप में देखा जा रहा है।

रंधावा के इस बयान पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने भी बेहद तल्ख प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर कोई किसी की मिलीभगत की बात कर रहा है, तो वह हमारे साथ नहीं रह सकता। वडिंग ने कड़े लहजे में कहा, “पार्टी को किसी भी ऐसे ‘स्लीपर सेल’ या नेता की जरूरत नहीं है जिसकी निष्ठा संदिग्ध हो।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ नेताओं के भाजपा और आम आदमी पार्टी के संपर्क में होने की खबरें आती रही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि रंधावा के साथ उनके जो भी निजी मुद्दे हैं, उन्हें सुलझा लिया जाएगा।

इस पूरे विवाद के केंद्र में मौजूद भूपेश बघेल ने फिलहाल संभलकर रुख अपनाया है। उन्होंने रंधावा के ‘समझौतावादी नेता’ वाले बयान पर सैद्धांतिक सहमति जताते हुए कहा कि अगर कोई नेता भाजपा के साथ सांठगांठ करता है, तो वह पार्टी के काम का नहीं है। बघेल ने स्पष्ट किया कि यह उनकी जिम्मेदारी है कि पार्टी में ऐसे तत्वों को पनपने न दिया जाए। हालांकि, उन्होंने राणा गुरजीत के घर हुई बैठक को ‘पारिवारिक मुलाकात’ करार दिया और इसे किसी औपचारिक बैठक का दर्जा देने से इनकार कर दिया।

वहीं, आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी बघेल ने विराम लगाया। उन्होंने उन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया कि चरणजीत सिंह चन्नी को अगले चुनाव के लिए मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर पेश किया जा रहा है। बघेल ने कहा कि ऐसी कोई बात बैठक में नहीं हुई है और पार्टी का एकमात्र लक्ष्य फिलहाल एकजुट होकर पंजाब में कांग्रेस की सरकार बनाना है। लेकिन जिस तरह से दिग्गज नेता एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं, उसने कांग्रेस आलाकमान की चिंताओं को जरूर बढ़ा दिया है।