रायपुर। प्रदेश में शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर सियासत और संगठनात्मक हलचल तेज होती दिखाई दे रही है। बैक डोर स्थानांतरण का विरोध कर रहे नवीन शिक्षाकर्मी संघ की मुहिम को अब सर्व शिक्षक संघ का भी समर्थन मिल गया है। संघ ने सरकार से बिना नीति के किए जा रहे स्थानांतरण तत्काल रोकने और सभी पात्र शिक्षकों के लिए खुली, पारदर्शी एवं समान अवसर आधारित स्थानांतरण नीति लागू करने की मांग की है। संगठन ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने इस विषय पर जल्द निर्णय नहीं लिया तो शिक्षक संगठन लोकतांत्रिक और नवाचारी तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेंगे।

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सर्व शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप पांडे ने बताया कि सरकार यदि स्थानांतरण करना चाहती है तो यह सुविधा कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सभी पात्र शिक्षकों को आवेदन का समान अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना है कि बिना सार्वजनिक नीति के चयनित स्थानांतरण होने से शिक्षक समाज में असंतोष बढ़ रहा है और सिस्टम की ट्रांसपेरेंसी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि युक्तियुक्तकरण, विभागीय परिस्थितियों और न्यायालय में लंबित मामले और उसके बाद की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। युक्तियुक्तकरण के बाद बैक डोर से बिना स्पष्ट नीति के स्थानांतरण करना उचित नहीं माना जा सकता। सरकार को पहले स्थानांतरण नीति घोषित करनी चाहिए, उसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन लेकर स्थानांतरण किए जाने चाहिए।

प्रदेश प्रवक्ता मोहम्मद यासीर इरफ़ान ने कहा कि बैक डोर स्थानांतरण की चर्चा लंबे समय से शिक्षक समाज में होती रही है। कहानी और बताने की बहुत सारी बातें हैं लेकिन शिक्षक कर्मचारी के रूप में मर्यादित है। यह ढाई साल पूर्ण कर चुकी सरकार को सोचना चाहिए। और यह भी ध्यान रखना चाहिए कि इतना अधिक समय बीत जाने के बाद भी शिक्षकों को खुली स्थानांतरण नीति नहीं बनाई गई। उनका कहना है कि स्थानांतरण हजारों शिक्षकों और उनके परिवारों की जरूरत से जुड़ा विषय है, इसलिए सरकार को इस पर गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए।

प्रदेश सचिव विनय मौर्य ने कहा कि शिक्षक समाज टकराव नहीं चाहता, लेकिन अपनी न्यायोचित मांगों पर अब चुप भी नहीं रहेगा। यदि बिना नीति के स्थानांतरण जारी रहे तो शिक्षक संगठन सेवा नियमों का पालन करते हुए लोकतांत्रिक और नवाचारी माध्यमों से केंद्रीय नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाएंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षकों द्वारा शैक्षणिक गतिविधियों में उपयोग किए जाने वाले नवाचार जनजागरण का माध्यम भी बन सकते हैं।

 

प्रदीप पांडे ने कहा कि सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति, पूर्व सेवा की गणना सहित कई महत्वपूर्ण विषय लंबे समय से लंबित हैं। विभिन्न शिक्षक संगठन इन मुद्दों पर साझा मंच से आवाज उठा रहे हैं। बैक डोर स्थानांतरण का विषय भी अब किसी एक संगठन का नहीं रह गया है, बल्कि प्रदेश के हजारों शिक्षकों की साझा चिंता बनता जा रहा है।

 

संघ ने मांग की है कि बिना नीति के किए जा रहे स्थानांतरण तत्काल रोके जाएं अथवा शीघ्र खुली, पारदर्शी एवं समान अवसर आधारित स्थानांतरण नीति लागू कर सभी पात्र शिक्षकों को आवेदन का अवसर दिया जाए। इस निर्णय के समर्थन में संगठन के प्रांतीय पदाधिकारियों एवं जिलाध्यक्षों सहित प्रकाश स्वर्णकार, ज्योति चंद्रवंशी, महेश पाण्डेय, कीर्ति लहरे, महेंद्र चंद्राकर, अभय पाण्डेय, बालेश्वर रजवाड़े, शंकर राठौर, आशीष पाण्डेय, समोद दुबे, सीमा देवांगन, अभिषेक शर्मा, अजय पाण्डेय, लोकनाथ सेन, बद्रीका भोई, ओमप्रकाश साहू, सिद्धार्थ चतवारे, आभाष श्रीवास, नेपाल साहू, लिंगराज चौधरी, गोपाल विश्वकर्मा, डैनी वर्मा, जितेंद्र काठले, अमित जैन, अमित खरे, दीपक सोनी, आशीष थावरे, प्रकाश महापात्र, अजय देवांगन, आर.पी. सिंह, ठाकुर मनमोहन सिंह, महेंद्र बहादुर, विपिन गहवई, विपिन ओझा, यशवंत साहू, अरुण साहू, भूपेंद्र देवांगन, दीपमाला साहू, देवेंद्र सोनी, गुलमोहन वर्मा, हेमंत भुआर्य, जीतेन्द्र साहू, ज्योति राज पाण्डेय, कमलेश घृतलहरे, लम्बोदर ठाकुर, लोकेश बंदे, मनोज गावरे, नम्रता राजपूत, नयन केशरी, ओमन मारकंडे, ओमप्रकाश दामले, प्रणिता शर्मा, तिवारी राजेंद्र शर्मा, रुपधर पटेल, तामेश गजेंद्र, विजय सिंह और विकास सिन्हा ने एकजुट होकर समर्थन व्यक्त किया।