नारी शक्ति वंदन पर सियासी ‘ड्रामा’: खाली सदन में कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव, विपक्ष बोला—दिखावा और महिला शक्ति से छल का खेल.
खाली सदन में निंदा प्रस्ताव: नारी शक्ति वंदन पर सियासी स्क्रिप्ट, विपक्ष बोला—दिखावा

बिलासपुर..जिला पंचायत की विशेष सामान्य सभा में टकराव के अनुमान थे, लेकिन विपक्ष की गैरहाजिरी ने पूरा परिदृश्य बदल दिया। 17 सदस्यीय सदन में महज 7 सदस्य मौजूद रहे। कांग्रेस के सभी सदस्य अनुपस्थित रहे, जबकि भाजपा के 9 में से 6 सदस्य ही पहुंचे। एक सदस्य गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से उपस्थित रहा।

निंदा प्रस्ताव पारित, बहस शुरू होने से पहले खत्म
सदन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश हुआ। अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी ने प्रस्ताव रखा, जिसे बिना किसी विरोध के ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। विपक्ष के न होने से बहस का मंच ही नहीं बन पाया।
गायब 11 सदस्य—बहाना या रणनीति?
अनुपस्थित सदस्यों ने शादी-ब्याह और समय अभाव का हवाला दिया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे रणनीतिक दूरी माना जा रहा है। भाजपा ने इसे मुद्दे से भागना बताया, जबकि विपक्षी खेमे में इसे “राजनीतिक नाटक” से दूरी कहा गया।
कांग्रेस का पलटवार: ध्यान भटकाने का हथकंडा”
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अभय नारायण राय ने निंदा प्रस्ताव को सीधे तौर पर “दिखावटी राजनीति” करार दिया। उन्होंने कहा—
“यह पूरा घटनाक्रम नारी सशक्तीकरण नहीं, बल्कि राजनीतिक स्टंट है। जिस बिल को लेकर निंदा प्रस्ताव लाया गया, उसी में सरकार ने जनगणना और परिसीमन की शर्त जोड़कर इसे अनिश्चित भविष्य में धकेल दिया है। सच्चाई यह है कि सरकार की मंशा महिलाओं को तत्काल आरक्षण देने की नहीं है, बल्कि इसे चुनावी मुद्दा बनाए रखना है।”
राय ने आगे कहा—अगर सरकार गंभीर है, तो मौजूदा 543 सीटों पर ही 33% आरक्षण लागू करे। लेकिन जानबूझकर ऐसी शर्तें जोड़ी गई हैं, जिनसे यह लागू ही न हो सके। यही कारण है कि कांग्रेस ने इस ‘नाटक’ का हिस्सा बनने से दूरी बनाई।”
उन्होंने भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा—
“जो पार्टी खुद अपने 9 में से 3 सदस्यों को बैठक में नहीं ला सकी, वह नारी शक्ति पर बड़ी-बड़ी बातें कर रही है। यह निंदा प्रस्ताव नहीं, बल्कि राजनीतिक दिखावा है।”
राजेश सूर्यवंशी.. इसलिए नहीं आए
अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी ने कहा—नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध कांग्रेस की पुरानी मानसिकता है। आज निंदा प्रस्ताव लाया गया, लेकिन विपक्ष के पास कोई जवाब नहीं था, इसलिए वे सदन में आए ही नहीं।
उपस्थित जनप्रतिनिधि और अधिकारियों की भूमिका
बैठक में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल, सदस्य भारती माली सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। प्रतिनिधि उमेश गौरहा और कोमल सिंह ठाकुर ने भी बैठक में भागीदारी निभाई।
एजेंडा से ज्यादा राजनीति, संदेश साफ
बैठक में ज्ञान भारतम पांडुलिपि सर्वेक्षण और सुशासन तिहार 2026 जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन पूरा फोकस निंदा प्रस्ताव पर ही रहा। अंत में तस्वीर यही रही—सदन में संख्या कम, लेकिन सियासत तेज। विपक्ष की अनुपस्थिति ने सत्ता पक्ष को खुला मैदान दिया, वहीं कांग्रेस ने दूरी बनाकर इसे राजनीतिक स्क्रिप्ट करार दिया।





