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मई दिवस पर विशेषः- श्रमिकों को जोखिम से बचाना आज भी बड़ी चुनौती क्यों है… ? बारिश-तूफान – भूकंप की तरह मशीन की खामियों का पूर्वानुमान क्यों नहीं लगाया जा सकता… ?

*श्रममेव जयते*
*शत शत नमन जो बलिदान हो गये राष्ट्र निर्माण में* *वेदांत के श्रमिकों को श्रद्धांजलि* *सशक्त श्रमिक*
*सशक्त समाज*
*सशक्त राज्य* *
*मजदूर*
*उनको जब-जब देखा*
*लोहा देखा*
*लोहे जैसे तपता देखा*
*गलते देखा**ढलते देखा*
*गोली जैसे*
*चलते देखा* **कर्तव्य की राह में शहीद होते देखा*
*परम श्रद्धेय केदारनाथ अग्रवाल की यह कविता श्रम वीरों को समर्पित*
1 में श्रमिक दिवस के रूप में 18 86 शिकागो में आंदोलनरत श्रमिकों के बम विस्फोट से शहीद हो जाने के पश्चात उनकी याद में श्रद्धांजलि देने के लिए पूरी दुनिया में मनाया जाता है।आज 2026 में 1 मई दिवस में सच्ची श्रद्धांजलि होगी जब किसी श्रमिक का परिवार अनाथ न हो अकाल मौत का शिकार न हो , दुर्घटना मानवीय लापरवाही से। मजदूरों के प्रति हम शपथ ले शून्य दुर्घटना का  …।एक बहुत प्रसिद्ध कहावत है किस्मत कुछ दुर्घटना से बचाती है …। ।जागरूकता समस्त दुर्घटनाओं से रक्षा करती है…..
परंतु श्रमिकों के प्रति संवेदनशीलता का अभाव शासन और नियोजक का उन्हें मौत की आगोश मे ले लेता है । इसके लिए ईमानदार प्रयास न मालिक, न शासन ,न श्रमिक संघ के द्वारा किया जाता है और अनेक परिवार अनाथ हो जाते हैं । मुआवजा देकर हम अपना ही ईतीश्री कर लेते हैं । क्योंकि वह दुर्घटना हमारे घर में नहीं हुई है। श्रमिक संघ का प्रयास हमेशा अतिरिक्त सुविधा वेतन बोनस से संबंधित तो रहता है  । परंतु कारखाने में कार्य की दशा में क्या परिवर्तन हो इसके बारे में श्रमिक संघ कभी आवाज नहीं उठाता । हमारे प्रयास से एक भी श्रमिक उनके लिए बनाए गए कानूनी अधिकार से वंचित न हो । यह तो अनिवार्य है । साथ ही उक्त श्रमिक दिवस को छत्तीसगढ ही नही पूरे देश मे जहां जहां श्रमिक दुर्घटना से अकाल मृत्यु को गले लगाए हैं उनकी याद में श्रद्धांजलि दिवस के रूप में मनाया जाए।

श्रमिकों के खून पसीने से देश का विकास होता है । यह उनके लिए सकारात्मक पहल होगा  ।भारत में श्रम कानून संविधान में समवर्ती सूची में आता है  ।जिसमें केंद्र और राज्य श्रमिक हित में कानून बना सकते हैं । श्रमिक देश समाज राष्ट्र और हर आमजन के लिए मजबूरी और जरूरी दोनों है  ।परंतु पता नहीं क्यों समाज का एक बड़ा वर्ग उन्हें सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा । उन्हें राष्ट्र का गौरव नहीं समझता।  जैसे सीमा पर हमारे देश के बहादुर जवान सजग रहते हैं  ।राष्ट्र के अंदर मेहनतकश अवाम आपकी सुविधा के लिए, सुरक्षा के लिए श्रम करता है ।उनके अधिकारों के लिए बड़ा वर्ग बहुत निरंकुश रहता है ।
मई दिवस पर 1886 की बात करना प्रशसंगिक नहीं । अभी तो हमें आज की बात करना है । वेदांता पावर में जहां 25 श्रमिकों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी  सिर्फ मानवीय लापरवाही से….। आज जब हम उसे दौर में हैं भूकंप कब आएगा ,सुनामी कब आएगी, मौसम कैसा रहेगा, कब तूफान आएगा – इन सब की जानकारी पल में लोगों तक पहुंच जाती है । तो फिर एक निश्चित कंपाउंड में किस मशीन की स्थिति कैसी है –  इसकी जानकारी क्यों नहीं हो पाती  ।इसका कारण निष्ठा और ईमानदारी और कर्तव्य हीनता  का भाव है  ।बॉयलर कब फट जाएगा इसका नियमित निरीक्षण अगर होता तो यह घटना वेदांता में नहीं होती और भविष्य में भी नहीं होगा  इसकी गारंटी नहीं है  ।भारतीय न्याय संहिता में अनेक संशोधन किए गए एक संशोधन इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर शासन के फैक्ट्री से संबंधित के विरुद्ध भी कोई कठोर सजा का प्रावधान रहना चाहिए  ।कारखाना नियमित रूप से निरीक्षण अगर संबंधितों के द्वारा कारखाने का का होगा और इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी ,औद्योगिक परिसर में तो हर कोई अवगत होंगे और जागरुक रहेंगे । बहुत छोटा सा प्रयास से हम अनेक परिवार को अनाथ होने से बचा सकते हैं । आओ हम सब मिलकर वेदांता में शहीद हुए श्रमिकों को सच्ची श्रद्धांजलि देने के लिए मई दिवस में शपथ लें और भविष्य की दुर्घटना से सुरक्षित रहने के लिए……।
जो श्रमशील है वही प्रगतिशील है।
श्रमवीरों को समर्पित*शत शत नमन शहीद श्रमिक भाईयों
दीपक पाण्डेय

भूतपूर्व श्रम अधिकारी छत्तीसगढ़  शासन बिलासपुर

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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