CG News.छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले में शिक्षा विभाग की एक बड़ी और गंभीर लापरवाही उजागर हुई है. ऑनलाइन अटेंडेंस (Vidya Samiksha Kendra / App) में ‘शून्य उपस्थिति’ दर्ज होने के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय ने 193 शिक्षकों और कर्मचारियों का सितंबर 2026 का वेतन रोकने का कड़ा आदेश जारी कर दिया. हालांकि, जब इस सूची की पड़ताल की गई, तो उसमें बेहद चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आईं.

वेतन रोके जाने वाली इस सूची में 8 दिवंगत शिक्षकों, 4 सेवानिवृत्त (Retired) कर्मचारियों, 3 स्थानांतरित (Transferred) शिक्षकों और 25 से अधिक मातृत्व व संतान पालन अवकाश (CCL) पर चल रहीं शिक्षिकाओं के नाम शामिल कर दिए गए हैं.

पड़ताल में सामने आया कि सिस्टम और विभागीय समन्वय की कमी के कारण कागजों पर बने नियम ने जीवित और मृत कर्मचारियों के बीच का अंतर ही खत्म कर दिया. बनऊ मेरावी, सोहन श्रीवास्तव, संध्या यादव, नीता साहू, विमल धुर्वे और निर्मला साहू समेत 8 ऐसे शिक्षक हैं, जिनका निधन हो चुका है, लेकिन उनका नाम ‘अनुपस्थित’ सूची में डालकर वेतन रोका गया.

गिरधर परमार, तिरथेश्वर तिवारी, चंद्रप्रकाश जोगांश और सुंदर मेरावी जैसे शिक्षक रिटायर हो चुके हैं. वहीं आरती प्रिया मिश्रा, संगीता गुप्ता और सालिक राठौर का तबादला अन्यत्र हो चुका है.

गुनेश्वरी चौबे, पूर्णिमा कश्यप और उमा साहू सहित 25 से अधिक शिक्षिकाएं नियमानुसार स्वीकृत मातृत्व और CCL अवकाश पर थीं. विभाग द्वारा उनका अवकाश तो स्वीकृत था, लेकिन अटेंडेंस पोर्टल/वीएसके ऐप में डेटा अपडेट नहीं किया गया था.

मृत्यु, सेवानिवृत्ति और स्थानांतरण के बाद कर्मचारियों के रिकॉर्ड को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की स्थापना शाखा द्वारा पोर्टल पर समय पर अपडेट नहीं किया गया.

ऑनलाइन ऐप से शून्य उपस्थिति का डेटा मिलते ही बिना सेवा पुस्तिका (Service Book) से मिलान किए सीधे वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया गया.

स्वीकृत मातृत्व अवकाश और संतान पालन अवकाश की जानकारी अटेंडेंस सिस्टम तक भेजी ही नहीं गई.

वनांचल और ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क कनेक्टिविटी या ऐप में आने वाली तकनीकी खामियों की जांच किए बिना कर्मचारियों को गैर-हाजिर मान लिया गया.

इस पूरे घटनाक्रम के बाद छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है: “बिना भौतिक सत्यापन के 193 कर्मचारियों का वेतन रोकना और उसमें मृत व अवकाश पर चल रहे शिक्षकों का नाम शामिल करना विभाग की घोर लापरवाही को दर्शाता है. इस फर्जी सूची को तैयार करने वाले जिम्मेदारों पर तत्काल कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होनी चाहिए.” — रमेश चंद्रवंशी, जिलाध्यक्ष, छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन