रायपुर। पदोन्नति में TET की बाध्यता के बीच पूर्व स्कूल शिक्षा सचिव नंदकुमार प्रदेश के शिक्षकों को याद आ रहे हैं। वजह उनका वह शानदार कार्यकाल है, जब 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद शिक्षकों के लिए D.Ed./B.Ed. की अहर्ता जरूरी हुई थी। उस समय पदस्थ शिक्षकों को आवश्यक अहर्ता हासिल कराने के लिए विशेष पाठ्यक्रम और परीक्षा की व्यवस्था की गई थी। अब TET की अनिवार्यता के कारण हजारों पदस्थ शिक्षकों की पदोन्नति अटक गई है। ऐसे में गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ ने राज्य सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से शिक्षकों को TET और B.Ed. की अहर्ता हासिल करने के लिए विशेष परीक्षा आयोजित करने की मांग की है।

संगठन के प्रदेश अध्यक्ष कृष्ण कुमार नवरंग ने बताया कि 2009 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद जब शिक्षकों के लिए D.Ed. और B.Ed. की अहर्ता का मामला सामने आया था, तब प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने शिक्षकों की समस्याओं के निराकरण के लिए तत्कालीन स्कूल शिक्षा सचिव नंदकुमार को निर्देश दिए थे। नंदकुमार ने मामले की गंभीरता को समझते हुए शिक्षकों के हित में पहल की। माध्यमिक शिक्षा मंडल के माध्यम से विशेष पाठ्यक्रम और परीक्षा की व्यवस्था कर पदस्थ शिक्षकों को आवश्यक अहर्ता हासिल करने का अवसर दिया गया था। उस समय शिक्षकों के सामने आई अहर्ता की अड़चन का समाधान निकालने की पहल हुई थी, जिसे आज भी शिक्षक याद कर रहे हैं।

नवरंग का कहना है कि आज एक बार फिर शिक्षकों के सामने इसी तरह की स्थिति है। वर्ष 2025 के निर्णय के बाद पदोन्नति में TET की बाध्यता के कारण बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षक विभाग में पदस्थ हैं, लेकिन आवश्यक अहर्ता नहीं होने के कारण उनकी पदोन्नति का रास्ता बंद हो गया है। सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से इस विषय पर पहल नहीं होने से समस्या के समाधान का रास्ता नहीं निकल रहा है।

उन्होंने बताया कि सरकार के सामने रास्ता मौजूद है। जिस तरह पहले पदस्थ शिक्षकों को आवश्यक अहर्ता हासिल करने के लिए विशेष परीक्षा और पाठ्यक्रम की व्यवस्था की गई थी, उसी तरह वर्तमान में TET की अहर्ता हासिल करने के लिए विशेष परीक्षा आयोजित की जा सकती है। शिक्षकों को अहर्ता हासिल करने का अवसर दिए बिना पदोन्नति से वंचित करना उचित नहीं है।

गवर्नमेंट एम्पलाइज वेलफेयर एसोसिएशन ने मांग की है कि वर्तमान में पदस्थ सभी संबंधित शिक्षकों के लिए TET की विशेष परीक्षा आयोजित की जाए। संगठन ने अधिकतम दो माह के भीतर परीक्षा कराने की मांग की है। परीक्षा में सफल शिक्षकों को TET की अहर्ता प्रदान करने के बाद नियमानुसार पदोन्नति का अवसर देने की मांग की गई है।

संगठन के उप प्रांताध्यक्ष भोलाराम मरकाम, महिला प्रकोष्ठ की संगीता पाटले और अंजू लता टंडन, महामंत्री सनत तथा बसंत बंजारे ने कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को पदोन्नति से वंचित करना उनके साथ न्यायसंगत नहीं है। सरकार को शिक्षकों की स्थिति को देखते हुए सकारात्मक पहल करनी चाहिए। शिक्षकों को आवश्यक अहर्ता हासिल करने का अवसर देकर पदोन्नति की प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

संगठन की ओर से चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मांग पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आपात बैठक बुलाकर आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी। संगठन का कहना है कि शिक्षकों के हित और पदोन्नति के अधिकार के लिए जरूरत पड़ने पर आंदोलन किया जाएगा।