दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 की तैयारियों के बीच एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है।

इस बार बजट दस्तावेज का ‘भाग-बी’ (Part B) न केवल कर प्रस्तावों तक सीमित रहेगा, बल्कि इसमें पहली बार देश की आर्थिक दिशा और नीतिगत सुधारों पर एक अभूतपूर्व विस्तार और जोर दिया जाएगा। सरकार की इस नई रणनीति का उद्देश्य बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की उभरती भूमिका और विकास की प्राथमिकताओं को एक स्पष्ट दिशा देना है। यह कदम न केवल बजट की संरचना को बदलेगा, बल्कि यह निवेशकों और वैश्विक बाजार को भारत के भविष्य के रोडमैप के बारे में एक ठोस संकेत भी देगा।

परंपरागत रूप से, केंद्रीय बजट को दो प्रमुख हिस्सों में बांटा जाता है। ‘भाग-ए’ में आमतौर पर विस्तृत नीतिगत घोषणाएं और विभिन्न योजनाओं का विवरण होता है, जबकि ‘भाग-बी’ मुख्य रूप से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर प्रस्तावों पर केंद्रित एक संक्षिप्त खंड होता है।

हालांकि, अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इस स्थापित परंपरा को बदलते हुए भाग-बी को एक व्यापक आर्थिक बयान के रूप में पेश करने जा रही हैं। इसमें न केवल कर नीति की रूपरेखा होगी, बल्कि भारत की आर्थिक शक्ति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए एक विस्तृत ब्लूप्रिंट भी शामिल होगा।

यह नया दृष्टिकोण अल्पकालिक आर्थिक स्थिरता और दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के बीच एक सेतु का काम करेगा। भाग-बी के माध्यम से सरकार उन स्थानीय शक्तियों को वैश्विक पहचान दिलाने का रोडमैप पेश करेगी, जहां भारत को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त है। इसमें उन क्षेत्रों का भी अनुमान लगाया जाएगा जो भविष्य में विकास के नए इंजन बन सकते हैं। इस वर्ष के बजट में रक्षा, बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर), पूंजीगत व्यय, बिजली और किफायती आवास जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर उच्च विकास का लक्ष्य रखे जाने की संभावना है। साथ ही, नीति निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक कल्याण और राजकोषीय अनुशासन के बीच एक सटीक संतुलन बनाए रखने की होगी।

वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक उथल-पुथल के मौजूदा दौर में, यह बजट भारत की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने और उसकी रफ्तार को बरकरार रखने के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में देखा जा रहा है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि बजट में राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की प्रक्रिया को जारी रखते हुए विकास की गति को तेज करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार का 15वां बजट होगा और 2024 में एनडीए की लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के बाद दूसरा पूर्ण बजट होगा। इसके साथ ही, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश कर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगी, जो देश के आर्थिक इतिहास में किसी भी महिला वित्त मंत्री के लिए पहली बार होगा।