Chhattisgarh Vidhansabha का आगामी मानसून सत्र बेहद हंगामेदार होने के आसार हैं। आगामी 13 जुलाई 2026 से शुरू होने वाले इस पांच दिवसीय सत्र में साय सरकार को विपक्ष के तीखे और आक्रामक सवालों का सामना करना पड़ेगा।

सदन में नकटी गांव विवाद, सरकारी स्कूलों में मंत्रोच्चार की अनिवार्यता, शिक्षक भर्ती में पारदर्शिता, महतारी वंदन योजना के क्रियान्वयन, साड़ी खरीदी, किसानों के लिए खाद-बीज की उपलब्धता और ग्राम पंचायतों के कामकाज जैसे बेहद संवेदनशील और जन सरोकार से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से गूंजेंगे।

विभिन्न विभागों से अब तक सैकड़ों लिखित प्रश्नों के जवाब मांगे जा चुके हैं, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि इस बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार सियासी तकरार देखने को मिलेगी।

13 जुलाई से शुरू होकर 17 जुलाई तक चलने वाले इस संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण सत्र के लिए विधायकों ने राजस्व एवं आपदा प्रबंधन से लेकर वन, जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा विभाग तक को घेरा है।

महिला एवं बाल विकास विभाग से अकेले 77 प्रश्नों के जवाब मांगे गए हैं, जिनमें महतारी वंदन योजना के भुगतान, मंगलसूत्र वितरण और साड़ी खरीदी में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। इसी तरह, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग से भी 50-50 से अधिक प्रश्न पूछे गए हैं।

स्कूलों में मंत्रोच्चार और खाद-बीज की किल्लत पर मचेगा रार

स्कूल शिक्षा विभाग से इस बार 53 प्रश्नों के जवाब मांगे गए हैं, जिनमें सरकारी स्कूलों में हाल ही में लागू की गई मंत्रोच्चार की नई व्यवस्था, शिक्षक भर्ती की वर्तमान स्थिति और शिक्षा के गिरते स्तर से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। वहीं, किसानों के मुद्दे पर कृषि विभाग से 55 प्रश्न पूछे गए हैं, जिनमें प्रदेश की सहकारी समितियों में उर्वरकों (खाद) और उन्नत बीजों के भंडारण, वितरण की अद्यतन स्थिति तथा बोआई के सीजन में किसानों को समय पर खाद की आपूर्ति जैसे विषय प्रमुख हैं। इसके अलावा उद्यानिकी विभाग से 24 और कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग से 25 से अधिक प्रश्नों के जवाब मांगे गए हैं।

2 साल में पूछे गए 11,526 सवाल, विपक्ष रहा सबसे आगे

विधानसभा के पिछले दो वर्षों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो फरवरी-मार्च 2024 से फरवरी-मार्च 2026 के बीच सदन में कुल 11,526 प्रश्न पूछे गए।

इसमें दिलचस्प बात यह है कि विपक्ष के विधायकों ने सरकार को घेरने में ज्यादा सक्रियता दिखाई और करीब 7,000 सवाल दागे, जबकि सत्ता पक्ष (भाजपा) के विधायकों ने भी अपनी ही सरकार से करीब 4,500 सवाल किए। भाजपा विधायकों में सबसे अधिक 264-264 प्रश्न वरिष्ठ नेता धरमलाल कौशिक, अजय चंद्राकर और भावना बोहरा ने पूछे। वहीं, कांग्रेस के भोलाराम साहू ने भी 264 सवाल किए। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत विभिन्न मुद्दों पर आक्रामक रहे और उन्होंने 256 सवाल पूछे, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस अवधि में केवल 72 सवाल ही लगाए।

इस आगामी जुलाई 2026 के मानसून सत्र के लिए विधायकों ने कुल 1,033 सवाल लगाए हैं। पांच दिनों के इस सत्र में कुल 5 बैठकें निर्धारित हैं।

विधानसभा के नियमों के तहत एक बैठक के लिए किसी एक सदस्य के अधिकतम चार प्रश्न ही विचार में लिए जाते हैं, जिससे पूरे सत्र के लिए अधिकतम प्रश्नों की संख्या 20 हो जाती है। इस बार सदन के कुल 36 सदस्यों ने नियमों के तहत अपने कोटे के अधिकतम 20-20 सवालों के जवाब सरकार से मांगे हैं।