Knee Pain : आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में बीमारियां भी समय से पहले दस्तक देने लगी हैं। पहले जहां घुटनों की समस्याएं 60 की उम्र के बाद आम मानी जाती थीं, वहीं अब ये खतरा 30 साल से पहले ही युवाओं को घेर रहा है। हाल ही में फिनलैंड की Oulu University में हुई एक अहम स्टडी में खुलासा हुआ है कि युवा वर्ग के घुटनों में बिना किसी लक्षण के अंदरूनी क्षति हो रही है, जो भविष्य में गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस में बदल सकती है।

इस स्टडी को “ऑस्टियोआर्थराइटिस एंड कार्टिलेज” नामक मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया है, जिसमें बताया गया कि 33 साल तक की उम्र के दो-तिहाई लोगों में कार्टिलेज डैमेज या हड्डी की समस्याएं देखी गई हैं, जबकि उनमें से अधिकतर को किसी प्रकार का दर्द या असुविधा महसूस नहीं हो रही थी। यानी, बीमारी शरीर में चुपचाप घर कर रही है और लोगों को इसका अंदाजा तक नहीं लग पा रहा।

रिसर्च में यह बात सामने आई कि जिन युवाओं को कोई लक्षण नहीं थे, उनके भी घुटनों में स्ट्रक्चरल बदलाव देखे गए। खासकर कार्टिलेज, जो घुटनों की सतह को सुरक्षित रखता है, उसमें क्षति पाई गई और घुटनों की वह कैपिंग जो जांघ की हड्डी और घुटने को जोड़ती है, वहां भी डैमेज स्पष्ट रूप से नजर आया।

इस खतरनाक ट्रेंड के पीछे सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है बढ़ता वजन। बॉडी मास इंडेक्स (BMI) जितना अधिक होता है, घुटनों पर उतना ही दबाव बढ़ता है जिससे धीरे-धीरे कार्टिलेज घिसने लगता है। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर और खून में यूरिक एसिड का बढ़ा हुआ स्तर भी ऑस्टियोआर्थराइटिस की शुरुआत में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

घुटनों की इस ‘Silent Damage’ को नजरअंदाज करना आने वाले समय में चलने-फिरने की क्षमता को सीमित कर सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि युवाओं को अब से ही अपने वजन पर नियंत्रण रखना चाहिए, फिजिकल एक्टिविटी बढ़ानी चाहिए और नियमित हेल्थ चेकअप कराते रहना चाहिए ताकि समय रहते घुटनों की समस्याओं को पकड़ा जा सके।Knee Pain