रायपुर(मनीष जायसवाल): स्कूल शिक्षा में जून का महीना कई वजहों से खास माना जाता है। इसी महीने स्कूल खुलते हैं, मानसून के आने की उम्मीद रहती है और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाता है। पिछले कुछ सालों में शिक्षकों के बीच एक और बात चर्चा में जुड़ गई है। वह है स्कूल शिक्षा विभाग के नए-नए प्रयोग। कई शिक्षक के बीच मजाक में जून को विभाग के हठयोग का महीना भी कहने लगे हैं।

कहा जाता है कि मौसम की भविष्यवाणी में मौसम विभाग का तोता कई बार गलत पर्चा उठा लेता है और अनुमान उल्टा पड़ जाता है। कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों स्कूल शिक्षा विभाग का भी दिखाई दे रहा है। एक आदेश आता है, फिर उसकी व्याख्या होती है, फिर भ्रम पैदा होता है और उसके बाद स्पष्टीकरण की नौबत आती है।

उधर मानसून की सुस्त चाल और बढ़ती उमस ने स्कूलों का माहौल पहले ही कठिन बना दिया है। पढ़ाने वाले शिक्षक और पढ़ने वाले विद्यार्थी दोनों बेहाल हैं। कई स्कूलों में पंखे भी राहत नहीं दे पा रहे हैं। दोपहर के समय कक्षाओं में बैठना मुश्किल हो रहा है और गर्मी का असर बच्चों की एकाग्रता पर भी दिखाई देने लगा है। ऐसे समय में शनिवार की समय-सारणी को लेकर खड़ा हुआ नया विवाद चर्चा का विषय बन गया है।
जिसकी वजह से विभाग की एक और किरकिरी सामने आ रही है।

लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) की ओर से जारी समय-सारणी के बाद प्रदेश के सरकारी स्कूल अलग-अलग समय पर संचालित होते नजर आए। कहीं शनिवार को पहले की तरह सुबह स्कूल लगे तो कहीं कक्षा 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित की गईं। इससे एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया कि जब स्कूल संचालन अवधि को लेकर पहले से आदेश प्रभावी हैं तो नई व्यवस्था की जरूरत क्यों पड़ी।

इस मामले को लेकर छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ ने आपत्ति दर्ज कराई है। संघ का कहना है कि बार-बार जारी होने वाले ऐसे आदेश स्कूलों में एकरूपता के बजाय भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं।

संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेंद्र दुबे का कहना है कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं है। बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए योग, व्यायाम, प्राणायाम, खेलकूद और अन्य गतिविधियां भी जरूरी हैं। इन गतिविधियों के लिए सुबह का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। यही वजह है कि सालों से शनिवार को सुबह स्कूल लगाने की व्यवस्था चली आ रही है। यदि शनिवार को भी स्कूल 10 बजे से 4 बजे तक संचालित होंगे तो इन गतिविधियों पर असर पड़ना स्वाभाविक है।

संघ ने याद दिलाया है कि पिछले वर्ष भी इसी प्रकार का विवाद सामने आया था। तब मामला शिक्षा मंत्री के संज्ञान में पहुंचा था और बाद में शनिवार को सुबह स्कूल संचालन को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किया गया था। अब एक बार फिर वैसी ही स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

शिक्षक संघ का कहना है कि स्कूल शिक्षा विभाग का पूरा तंत्र एक इकोसिस्टम की तरह काम करता है। अधिकांश शिक्षक अपने कार्यस्थल से कई किलोमीटर दूर रहते हैं। युक्तिकरण के बाद अनेक परिसरों में पहली से बारहवीं तक की कक्षाएं संचालित हो रही हैं। ऐसे में समय-सारणी में बदलाव केवल घड़ी की सुई आगे-पीछे करने का मामला नहीं होता, उसका असर पूरे स्कूल संचालन पर पड़ता है।

संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से हस्तक्षेप कर शनिवार को विद्यालय संचालन का समय पूर्ववत सुबह निर्धारित करने की मांग की है।

फिलहाल सवाल केवल शनिवार की समय-सारणी का नहीं है। सवाल यह भी है कि जब प्रदेश मानसून का इंतजार कर रहा है, स्कूल गर्मी और उमस से जूझ रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था को स्थिरता की जरूरत है, तब विभाग बार-बार ऐसे प्रयोग क्यों कर रहा है जिनसे मैदान में भ्रम ज्यादा और लाभ कम दिखाई देता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मौसम विभाग के तोते की तरह इस बार भी शिक्षा विभाग ने गलत पर्चा उठा लिया है।