बिलासपुर…च्वाइस सेंटर संचालकों के क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर ऑनलाइन रकम खाते में मंगाने और बदले में नकदी लेकर फरार होने वाले दो आरोपियों को रेंज साइबर पुलिस ने गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बिलासपुर समेत प्रदेश के नौ जिलों में करीब 45 च्वाइस सेंटर संचालकों को निशाना बनाया। अब तक सामने आए मामलों में ठगी की अनुमानित रकम 20 से 25 लाख रुपये बताई गई है। आरोपियों के कब्जे से एक लाख दो हजार रुपये नकद, घटना में इस्तेमाल की गई बलेनो कार, एक स्कूटी और दो मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं।

मामले का खुलासा बिल्हा मोड़ स्थित लक्ष्मी च्वाइस सेंटर के संचालक देवेंद्र रजक की शिकायत के बाद हुआ। शिकायत के अनुसार, 5 अक्टूबर को दोपहर करीब 12:38 बजे एक व्यक्ति बलेनो कार से सेंटर पहुंचा। उसने संचालक से कहा कि वह फोनपे से होने वाले लेन-देन के बदले नकद रकम चाहता है। संचालक के सहमत होने पर आरोपी ने सेंटर के क्यूआर कोड की तस्वीर अपने मोबाइल में ली और वहां से चला गया। इसके बाद क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर 16 हजार रुपये का लेन-देन किया गया और संचालक को नकद रकम दे दी गई।

अगले दिन देवेंद्र के बैंक खाते पर रोक लग गई। चकरभाठा स्थित भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में जानकारी लेने पर पता चला कि उनका फोनपे से जुड़ा बैंक खाता साइबर धोखाधड़ी के मामले में रोक दिया गया है। इसके बाद च्वाइस सेंटर संचालकों के वाट्सऐप समूह से उन्हें जानकारी मिली कि इसी तरीके से दूसरे संचालकों के साथ भी धोखाधड़ी की गई है। शिकायत के आधार पर रेंज साइबर थाना बिलासपुर में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की गई।

क्यूआर कोड की तस्वीर…रकम ट्रांसफर

जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी बिलासपुर के हिर्री और बिल्हा क्षेत्र में फिर से वारदात करने की फिराक में घूम रहा है। पुलिस ने घेराबंदी कर रायपुर निवासी अंकित आहूजा को पकड़ा। पूछताछ में उसने अपने साथी आशीष केवटवानी के साथ मिलकर वारदात करना स्वीकार किया।

पुलिस के अनुसार, अंकित अलग-अलग च्वाइस और साझा सेवा केंद्रों में पहुंचकर संचालकों से नकद लेन-देन की बात करता था। इस दौरान वह केंद्र के क्यूआर कोड की तस्वीर अपने मोबाइल से साथी आशीष को भेज देता था। आशीष उस क्यूआर कोड का इस्तेमाल कर रकम ट्रांसफर करता था, जबकि अंकित संचालक से नकदी लेकर निकल जाता था। बाद में जब संचालकों के बैंक खाते साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी रकम के कारण रोक दिए जाते थे, तब उन्हें पूरे मामले की जानकारी होती थी।

पुलिस की जांच में अब तक करीब 45 पीड़ितों के आवेदन मिलने की बात सामने आई है। इन शिकायतों के आधार पर ठगी की कुल रकम 20 से 25 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस का कहना है कि दोनों आरोपी रायपुर से साथ निकलकर अलग-अलग जिलों में पहुंचते और च्वाइस सेंटर संचालकों को निशाना बनाते थे।

नौ जिलों तक फैला था ठगी का दायरा

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने बिलासपुर के अलावा रायपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सक्ती और दुर्ग जिले में भी वारदात की। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अंकित आहूजा और आशीष केवटवानी, दोनों निवासी रायपुर, के रूप में हुई है। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 317(4) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

कार्रवाई में रेंज साइबर थाना प्रभारी प्रसाद सिन्हा, सहायक उपनिरीक्षक अशोक कश्यप, आरक्षक दीपक उपाध्याय और दीपक यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस मामले में प्राप्त शिकायतों के आधार पर आगे की जांच कर रही है।