बिलासपुर… लंबित मांगों पर फैसला नहीं होने से कर्मचारियों का सब्र बुधवार को सड़क पर उतर आया। कर्मचारी फेडरेशन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कर्मचारी कामकाज छोड़कर कलेक्टोरेट पहुंचे और सरकार को ‘मोदी की गारंटी’ याद दिलाते हुए जमकर नारेबाजी की।

कलेक्टर कार्यालय के सामने हुए प्रदर्शन से परिसर के आसपास भीड़ जमा हो गई और करीब एक घंटे तक यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को मांगपत्र सौंपकर दो टूक कहा कि अब आश्वासन नहीं, मांगों पर निर्णय चाहिए।

प्रदर्शन की अगुवाई जी. आर. चंद्राकर, पवन कुमार शर्मा और किशोर शर्मा ने की। उनके साथ विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी और संभाग तथा प्रदेश के कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

प्रदर्शनकारियों ने कामकाज बंद रखकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और लंबित मांगों को लेकर अपना आक्रोश जाहिर किया।

‘गारंटी’ का सरकार से हिसाब मांग रहे कर्मचारी

कर्मचारियों का सबसे तीखा सवाल ‘मोदी की गारंटी’ को लेकर रहा। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि चुनाव और सरकार बनने के दौरान कर्मचारियों से जुड़े जिन मुद्दों पर भरोसा दिलाया गया था, अब उन पर ठोस निर्णय होना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री के उस भाषण का भी हवाला दिया, जिसमें कर्मचारियों की मांगों को लेकर आश्वासन दिए जाने की बात कही गई थी।

जी. आर. चंद्राकर ने कर्मचारियों की लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय की जरूरत पर जोर दिया। उनके मुताबिक कर्मचारी लगातार शासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन ज्ञापन और मांगों के बाद भी यदि निर्णय नहीं होता है तो आंदोलन को आगे बढ़ाना कर्मचारियों की मजबूरी होगी।

पवन कुमार शर्मा ने मांगों को लेकर कर्मचारियों के बीच बढ़ते असंतोष का मुद्दा उठाते हुए कहा कि महंगाई भत्ता, चिकित्सा सुविधा, अवकाश नगदीकरण, वेतनमान और पदोन्नति जैसे मुद्दे कर्मचारियों के सीधे हित से जुड़े हैं। सरकार को इन्हें टालने के बजाय स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।

वहीं किशोर शर्मा ने आंदोलन को आगे प्रदेश स्तर पर ले जाने की चेतावनी दी। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यदि मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं हुआ तो कलमबंद आंदोलन और जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाया जाएगा।

महंगाई भत्ते से लेकर नियमितीकरण की मांगें

फेडरेशन के मांगपत्र में कर्मचारियों और पेंशनरों को केंद्र के अनुरूप महंगाई भत्ता देने, कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने, 240 दिन के स्थान पर 300 दिन का अवकाश नगदीकरण करने, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों का वेतनमान पुनरीक्षित करने और शिक्षकों को प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा का लाभ देने की मांग की गई है।

इसी तरह शिक्षक पात्रता परीक्षा के स्थान पर सीमित विभागीय परीक्षा का प्रावधान करने, अनुकंपा नियुक्ति में 10 प्रतिशत की सीमा समाप्त करने, संविदा, दैनिक वेतनभोगी और अनियमित कर्मचारियों को रिक्त पदों पर नियमित करने तथा सेवा सुरक्षा देने की मांग भी उठाई गई है। रिक्त पदों पर भर्ती और पदोन्नति तथा तकनीकी संवर्ग के कर्मचारियों को निर्धारित समय पर पदोन्नति का लाभ देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

कलेक्टोरेट के बाहर नारेबाजी, सड़क पर दबाव

कर्मचारियों के प्रदर्शन के दौरान कलेक्टोरेट परिसर के आसपास बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रही। नारेबाजी और कर्मचारियों की भीड़ के कारण सड़क पर यातायात का दबाव बढ़ गया और करीब एक घंटे तक आवागमन प्रभावित रहा। प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के नाम मांगपत्र जिला प्रशासन को सौंपा। जिला प्रशासन की ओर से कर्मचारियों का मांगपत्र लेने अधिकारी नारायण प्रसाद गभेल मौके पर पहुंचे। कर्मचारियों ने उनके समक्ष अपनी लंबित मांगें रखीं और शासन तक मांगों को पहुंचाने का आग्रह किया।

कर्मचारी नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह प्रदर्शन अंतिम पड़ाव नहीं है। मांगों पर शासन का रुख सामने आने के बाद आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी। फेडरेशन ने संकेत दिया है कि मांगों की अनदेखी जारी रही तो सड़क पर दिखा यह आक्रोश कलमबंद आंदोलन में बदल सकता है।