रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस में अध्यक्ष पद को लेकर एक बार फिर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। बीते करीब एक साल से समय-समय पर प्रदेश कांग्रेस के नेतृत्व में बदलाव की अटकलें सामने आती रही हैं। अब पंजाब और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन में हुए बड़े फेरबदल के बाद छत्तीसगढ़ में भी इस तरह की चर्चाओं ने फिर जोर पकड़ लिया है।

इसी बीच पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के दिल्ली प्रवास ने इन कयासों को और हवा दे दी है। हालांकि, सिंहदेव के दिल्ली दौरे को लेकर फिलहाल किसी आधिकारिक बयान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बदलने की बात सामने नहीं आई है।

मौजूदा समय में दीपक बैज छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। कांग्रेस की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। बैज ने जुलाई 2023 में यह जिम्मेदारी संभाली थी।

पंजाब और यूपी में चुनाव से पहले संगठन में बदलाव

कांग्रेस ने हाल ही में पंजाब और उत्तर प्रदेश में प्रदेश संगठन के नेतृत्व में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। पंजाब में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के इस्तीफे के बाद पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुआ है और पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही आंतरिक खींचतान की खबरों के बीच सामने आया है।

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने अजय राय की जगह रामपुर खास से तीन बार की विधायक और कांग्रेस विधायक दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। वहीं सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। यूपी में भी यह फेरबदल 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हुआ है।

यानी दोनों राज्यों में चुनाव करीब आने के बावजूद कांग्रेस ने संगठनात्मक नेतृत्व में बदलाव किया है। यही वजह है कि इन फैसलों को छत्तीसगढ़ में कांग्रेस संगठन के संभावित फेरबदल की चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में क्यों उठ रही बदलाव की चर्चा?

छत्तीसगढ़ में दीपक बैज जुलाई 2023 से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हैं। वे बस्तर क्षेत्र से आने वाले आदिवासी नेता हैं और कांग्रेस ने उन्हें विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले प्रदेश संगठन की कमान सौंपी थी। उस समय भी उनके चयन को संगठन में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण साधने की कवायद के तौर पर देखा गया था।

विधानसभा और लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के सामने संगठन को दोबारा मजबूत करने की चुनौती है। इसी पृष्ठभूमि में पार्टी के भीतर अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समूहों को संगठन में प्रतिनिधित्व देने की चर्चाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। हालांकि, फिलहाल कांग्रेस की ओर से छत्तीसगढ़ PCC अध्यक्ष को बदलने या नया अध्यक्ष नियुक्त करने का कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।

टीएस सिंहदेव के दिल्ली दौरे ने बढ़ाई हलचल

इसी बीच पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव के दिल्ली प्रवास ने चर्चाओं को और तेज कर दिया है। सिंहदेव का दिल्ली जाना अपने आप में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद में बदलाव का प्रमाण नहीं है। लेकिन पंजाब और यूपी में हालिया संगठनात्मक फैसलों के तुरंत बाद उनके दिल्ली दौरे को राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह से देखा जा रहा है।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस में सिंहदेव लंबे समय से प्रभावशाली वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे हैं। ऐसे में यदि दिल्ली में उनकी कांग्रेस नेतृत्व के साथ संगठन को लेकर कोई महत्वपूर्ण बातचीत होती है, तो स्वाभाविक तौर पर उसके राजनीतिक मायने निकाले जाएंगे। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि उनका दिल्ली प्रवास प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से जुड़ा है या नहीं।

क्या दो कार्यकारी अध्यक्षों का फॉर्मूला संभव है?

छत्तीसगढ़ में यदि कांग्रेस नेतृत्व संगठन में बदलाव पर विचार करता है तो एक विकल्प यह भी हो सकता है कि मौजूदा अध्यक्ष दीपक बैज को पद पर बनाए रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों और सामाजिक समीकरणों को प्रतिनिधित्व देने के लिए कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाएं।

उत्तर प्रदेश में आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष बनाने के साथ इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी देने का फैसला इसी तरह की संगठनात्मक व्यवस्था का उदाहरण है।

छत्तीसगढ़ में भी इसी तर्ज पर एक से अधिक कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की चर्चा राजनीतिक गलियारों में हो सकती है। हालांकि, यह फिलहाल सिर्फ एक संभावित संगठनात्मक विकल्प और राजनीतिक अटकल है। कांग्रेस हाईकमान की ओर से छत्तीसगढ़ के लिए ऐसा कोई फॉर्मूला घोषित नहीं किया गया है।