जांजगीर-चांपा : (मनीष जायसवाल) तेंदुआधाम में 3 और 4 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन का दो दिवसीय प्रांतीय संगठन समीक्षा, संवाद एवं संकल्प अधिवेशन होगा। इसमें प्रदेश पदाधिकारियों के साथ जिला और ब्लॉक अध्यक्ष शामिल होंगे। शिक्षकों की लंबित मांगों पर चर्चा के साथ आगे की रणनीति भी तैयार की जाएगी। फेडरेशन के प्रदेश संयोजक मनीष मिश्रा ने बताया कि शिक्षकों में सरकार को लेकर आक्रोश है। आश्वासन मिलते रहे, लेकिन अब शिक्षक उन आश्वासनों का ठोस नतीजा देखना चाहते हैं।

 

मनीष मिश्रा ने बताते है कि पूर्व की सरकार के समय शिक्षकों को विवादों में उलझाया गया और अब वही स्थिति मौजूदा सरकार में भी दिखाई दे रही है। 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा की ओर से कर्मचारियों और शिक्षकों से जुड़े कई मुद्दों पर बातें कही गई थीं। केंद्र के समान डीए, डीए एरियर्स और सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति जैसे मुद्दे उस समय प्रमुखता से उठे थे। अब कर्मचारी संगठन इन्हीं बातों को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। मिश्रा का कहना है कि जवाब के लिए संगठन लगातार सरकार की ओर देख रहा है, लेकिन ठोस जवाब मिलता ही नहीं ..।

 

मनीष मिश्रा ने बताया कि भाजपा जब सत्ता में नहीं थी, तब फेडरेशन के आंदोलन के दौरान भाजपा नेताओं ने शिक्षकों के बीच पहुंचकर सहायक शिक्षकों की वेतन विसंगति की मांग का समर्थन किया था। धरना स्थल पर पहुंचकर समर्थन दिया गया और सत्ता में आने के बाद मांग पूरी होने का भरोसा भी दिलाया गया। अब सत्ता में आने के बाद तीन साल होने जा रहे है।

 

मिश्रा कहते है कि सरकार मोदी की गारंटी को पूरा करने की बात करती है। कर्मचारी के लिए किसी गारंटी का अर्थ तब बनता है, जब उसका असर वेतन, पदोन्नति या सेवा शर्त में दिखाई दे। शिक्षक चुनाव के समय कही गई बातों को सुनता है और बाद में उसका असर अपनी नौकरी में कितना लागू हुआ, यह भी देखता है। उन्होंने कहा कि यहां स्थिति कुछ ऐसी हो गई है कि शिक्षकों का आंदोलन होता है तो संवाद शुरू होता है और संवाद के बाद फिर इंतजार शुरू हो जाता है। मिश्रा ने कहा, हम शासकीय कर्मचारी हैं, एक दायरे में रहते हैं। शिक्षक इस सिलसिले को राजनीतिक रूप से आगे नहीं बढ़ा सकते हैं।

 

मनीष मिश्रा ने शिक्षक संगठनों के मूल मुद्दों से ध्यान हटाने और उनकी एकता को कमजोर करने की कोशिश किए जाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि एक ओर विभाग टीईटी का समर्थन करता है तो दूसरी ओर पदोन्नति की बात की जा रही है। शिक्षक के सामने दोनों बातें एक साथ खड़ी हैं। संगठन चाहता है कि सरकार अपनी नीति और प्रक्रिया को लेकर स्थिति साफ करे।

 

टीईटी को लेकर मिश्रा ने कहा कि सेवारत शिक्षकों के लिए यह अब सिर्फ परीक्षा का विषय नहीं है। इसका सीधा संबंध पदोन्नति से जुड़ गया है। शिक्षक संगठन चाहते हैं कि विभागीय टीईटी साल में दो से तीन बार हो। परीक्षा की तैयारी के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण मिले और पदोन्नति की प्रक्रिया में शिक्षकों को टीईटी पास करने का पर्याप्त मौका दिया जाए।

 

उन्होंने यह भी कहना है कि शिक्षक विभागीय टीईटी देने के लिए तैयार हैं। वे पदोन्नति भी चाहते हैं, मगर ऐसी प्रक्रिया के साथ जिसमें टीईटी पास करने का पर्याप्त अवसर मिले। राज्य सरकार को छत्तीसगढ़ की शिक्षकों की भर्तियों कैसे हुई और वर्तमान उनकी शैक्षणिक परिस्थितियों को शिक्षकों की सेवा संबंधी स्थिति को केंद्र के सामने मजबूती से रखना चाहिए।

 

मनीष मिश्रा बताते है कि कई मांगों को लेकर सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच बातचीत हो चुकी है। बैठकें हुई हैं और आश्वासन भी मिले हैं, मगर कई मुद्दों पर अंतिम फैसला बाकी है। सरकार को बताना चाहिए कि किस मांग पर क्या प्रक्रिया चल रही है और किस मामले में क्या फैसला लिया गया है। इससे सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच चल रही बातचीत को तथ्यों के आधार पर समझा जा सकेगा।

 

उन्होंने बताया कि अब आश्वासनों की तारीख खत्म होनी चाहिए। सरकार ठोस योजना लेकर आए, समय सीमा बताए और शिक्षक संगठनों को भरोसे में लेकर आगे बढ़े। फेडरेशन के इस अधिवेशन में संगठन की अब तक की गतिविधियों की समीक्षा के साथ लंबित मांगों को लेकर आगे की रणनीति पर भी चर्चा होगी। शिक्षकों में आक्रोश है और अधिवेशन में इसी आक्रोश को संगठन की अगली रणनीति का आधार बनाने पर भी चर्चा होगी।