बिलासपुर। शिक्षक पात्रता परीक्षा TET को अनिवार्य किए जाने के फैसले से राहत की मांग को लेकर teacher ने supreme court का दरवाजा खटखटाया है।

Tet नियम लागू होने से पहले भर्ती हुए शिक्षकों पर भी परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता लागू किए जाने के मामले में शिक्षकों ने supreme court के समक्ष अंतरिम आवेदन दायर किया है।

अधिवक्ता विशाल अरुण मिश्रा के माध्यम से दाखिल इस आवेदन में याचिकाकर्ता शिक्षकों ने पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को tet की अनिवार्यता से राहत देने की मांग की गई है।

शिक्षक lb संवर्ग से प्रशांत शर्मा, सेमलाल साहू, गीताराम साहू, सुरेश राठौर, गणेश यादव व रजनी कोरी, छत्तीसगढ़ के बम्हनीडीह, भानुप्रतापपुर, कांकेर, बस्तर, मोहला-मानपुर और नारायणपुर सहित अन्य राज्यों के शिक्षकों ने भी इसी मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

बता दें कि supreme court ने राजेश चौहान विरुद्ध भारत संघ मामले की सुनवाई के दौरान 8 सितंबर को निर्देश दिया था कि अगले आदेश तक शिक्षकों की नियुक्ति या समायोजन निर्धारित वैधानिक योग्यताओं के अनुरूप ही किया जाए। इस निर्देश के बाद पहले से नियुक्त teacher के बीच tet की अनिवार्यता को लेकर चिंता बढ़ गई है।

याचिकाकर्ता शिक्षकों ने अपनी याचिका में कहा है, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 लागू होने से पहले उनकी नियुक्तियां तत्कालीन भर्ती नियमों और निर्धारित शैक्षणिक योग्यताओं के आधार पर हुई थीं। ऐसे में बाद में लागू किए गए नियमों को पुरानी भर्तियों पर लागू करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि भर्ती के समय निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले शिक्षकों पर सेवा में बने रहने के लिए नई पात्रता लागू नहीं की जानी चाहिए।

शिक्षकों ने अपनी याचिका में कहा है, केंद्र सरकार द्वारा 17 अक्टूबर 2017 को आरटीई अधिनियम में किए गए संशोधन के कारण यह स्थिति बनी है। संशोधन में 31 मार्च 2015 तक नियुक्त ऐसे शिक्षकों को चार वर्ष के भीतर निर्धारित न्यूनतम योग्यताएं हासिल करने का प्रावधान किया गया था, जिन्होंने ये योग्यताएं प्राप्त नहीं की थी।