बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में आदिम जाति कल्याण विभाग के एक कर्मचारी को स्कूल शिक्षा विभाग में पदोन्नति देने से जुड़ा विवाद सामने आया है। मामले में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे द्वारा 11 जून 2026 को जारी पत्र को नए DEO अजय कौशिक ने 27 जुलाई 2026 को निरस्त कर दिया। विभागीय पत्राचार के अनुसार, संबंधित कर्मचारी शशांक द्विवेदी की मूल नियुक्ति आदिम जाति विकास विभाग में हुई थी और वह उसी विभाग के कर्मचारी हैं। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग में उनकी पदोन्नति की पात्रता को लेकर सवाल उठे हैं।

यह मामला केवल पदोन्नति के दावे तक सीमित नहीं है। इसमें तत्कालीन DEO कार्यालय के दो अलग-अलग पत्रों, न्यायालयीन कार्यवाही और शासन की ओर से पहले दिए गए निर्देशों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, पूरे मामले में कथित अनियमितता और अधिकारियों की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों तथा सक्षम प्राधिकारी की जांच के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, तत्कालीन DEO विजय टांडे ने 29 मई 2026 को पत्र क्रमांक 6778 के माध्यम से लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को बताया था कि शशांक द्विवेदी की मूल नियुक्ति वर्ष 2005 में सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग द्वारा की गई थी। पत्र में यह भी उल्लेख था कि कर्मचारी का वेतन और क्रमोन्नति संबंधी प्रक्रिया उसी विभाग से जुड़ी रही है। इस आधार पर स्कूल शिक्षा विभाग में सहायक ग्रेड-3 के पद पर पदोन्नति संभव नहीं होने की बात कही गई थी।

इसके बाद 11 जून 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र क्रमांक 7546 भेजे जाने की जानकारी सामने आई। आरोप है कि इस पत्र में पहले के रुख से अलग बात रखी गई और वर्ष 2016 की पदोन्नति प्रक्रिया में वरिष्ठ कर्मचारी को छोड़ दिए जाने का हवाला देते हुए शशांक द्विवेदी के पदोन्नति संबंधी दावे का समर्थन किया गया।

दोनों पत्रों के बीच सामने आए इस अंतर ने विभागीय निर्णय प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। मामले में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि दूसरे पत्र के लिए क्या आधार अपनाया गया था और क्या संबंधित कर्मचारी स्कूल शिक्षा विभाग के संवर्ग में पदोन्नति पाने के लिए पात्र थे।

मामले से जुड़े विवरण के अनुसार, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा रिट अपील खारिज किए जाने के बाद अतिरिक्त महाधिवक्ता यशवंत सिंह ठाकुर ने 1 जुलाई 2025 को विधिक राय दी थी। बताया गया है कि राय में संबंधित कर्मचारी के स्कूल शिक्षा विभाग में पदस्थ या संविलियन नहीं होने का उल्लेख करते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर करने की सलाह दी गई थी।

इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्रालय ने 7 जुलाई 2025 को DEO को SLP से संबंधित प्रस्ताव तत्काल भेजने के निर्देश दिए थे। आरोप लगाया गया है कि इस निर्देश के बावजूद प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। इस संबंध में संबंधित फाइल और शासन को भेजे गए पत्राचार की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रस्ताव पर क्या कार्रवाई हुई थी और देरी के लिए कौन जिम्मेदार था।

नए DEO ने समीक्षा के बाद 11 जून का पत्र किया निरस्त

विजय टांडे के स्थानांतरण के बाद DEO अजय कौशिक ने मामले की समीक्षा कराई। उपलब्ध विवरण के अनुसार, समीक्षा में यह बात सामने आई कि शशांक द्विवेदी आदिम जाति कल्याण विभाग के कर्मचारी हैं और स्कूल शिक्षा विभाग के संवर्ग में उनकी स्थिति पदोन्नति के लिए स्पष्ट नहीं है।

इसके बाद 27 जुलाई 2026 को पत्र क्रमांक 9226 जारी कर 11 जून 2026 के पत्र को निरस्त किए जाने की जानकारी दी गई। बताया गया है कि संबंधित पत्र सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग को भेजा गया था। इस कार्रवाई के बाद स्कूल शिक्षा विभाग में कर्मचारी की पदोन्नति को लेकर पहले जारी पत्र के आधार पर आगे बढ़ने का रास्ता बंद हो गया।

पूर्व DEO की भूमिका और विभागीय कार्रवाई पर सवाल

मामले में तत्कालीन DEO विजय टांडे की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि शिक्षक पदोन्नति और युक्तियुक्तकरण से संबंधित अन्य मामलों में भी उनके कार्यकाल के दौरान अनियमितताएं हुई थीं और जांच रिपोर्ट DPI को भेजी गई थी। हालांकि, इन आरोपों और कथित जांच निष्कर्षों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित जांच रिपोर्ट, निष्कर्ष और विभागीय कार्रवाई के रिकॉर्ड की पुष्टि जरूरी है।