बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता, तैयारी और वितरण व्यवस्था को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने व्यवस्था की जमीनी स्थिति का आकलन करने के लिए कोर्ट कमिश्नरों को जिम्मेदारी सौंपी है।

उन्हें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन व्यवस्था का अध्ययन कर छह सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य न्यायाधीश कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने मुख्य सचिव की ओर से पेश हलफनामे पर विचार करते हुए यह निर्देश दिया। अदालत चाहती है कि बच्चों को मिलने वाले भोजन की व्यवस्था में आ रही समस्याओं की पहचान हो और उनमें सुधार के लिए ठोस सुझाव सामने आएं। मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

खाना पकाने से वितरण तक की होगी पड़ताल
कोर्ट कमिश्नरों को भोजन तैयार करने से लेकर बच्चों तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का अध्ययन करना होगा। इसमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भोजन की व्यवस्था, महिला स्व-सहायता समूहों के सामने आने वाली समस्याएं और सेंट्रलाइज्ड किचन के माध्यम से भोजन वितरण की स्थिति जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।

अदालत ने संबंधित अधिकारियों को जांच में आवश्यक सहयोग देने के निर्देश भी दिए हैं। छह सप्ताह के भीतर प्रस्तुत की जाने वाली रिपोर्ट के आधार पर भोजन व्यवस्था की चुनौतियों और संभावित सुधारों को लेकर आगे विचार किया जा सकेगा।

784 करोड़ रुपये की योजना, लाखों बच्चों तक भोजन पहुंचाने का लक्ष्य
पिछली सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना की जानकारी दी गई थी। सरकार के मुताबिक, प्रदेश के 56,254 स्कूलों में लगभग 27.15 लाख विद्यार्थियों को 240 दिनों तक मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने की योजना है।

योजना के तहत 93,420 रसोइयों-सह-सहायकों की व्यवस्था और 16,062 स्कूलों में पुराने रसोई उपकरण बदलने का प्रस्ताव भी बताया गया। इसके लिए कुल 783.92 करोड़ रुपये के व्यय का प्रावधान होने की जानकारी दी गई।

हालांकि, योजना के बजट और निर्धारित लक्ष्यों के साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है कि बच्चों को वास्तव में निर्धारित मानकों के अनुरूप भोजन मिल रहा है या नहीं। कोर्ट कमिश्नरों की पड़ताल इसी जमीनी स्थिति को समझने में मदद करेगी।

सिर्फ सात जिलों में मिलेट चिक्की वितरण पर सवाल
सुनवाई के दौरान बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने में क्षेत्रीय असमानता का मुद्दा भी उठा। जानकारी के अनुसार, राज्य स्तरीय समिति ने फ्लेक्सी फंड के माध्यम से सात जिलों में सप्ताह में तीन दिन प्रति बच्चे 20 ग्राम मिलेट चिक्की देने की व्यवस्था की है।

इनमें जशपुर और रायगढ़ के अलावा नियद नेल्लानार योजना के अंतर्गत आने वाले पांच जिले शामिल बताए गए हैं। न्याय मित्र ने सवाल उठाया कि जब बच्चों के पोषण के लिए यह व्यवस्था की गई है, तो इसका लाभ अन्य जिलों के विद्यार्थियों को क्यों नहीं मिल रहा है। इस पर राज्य सरकार के अधिवक्ता ने निर्देश लेकर जवाब देने की बात कही।