रायपुर… छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की कार्रवाई आज निर्णायक मोड़ ले सकती है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मामले में करीब 30 से अधिक आरोपियों के खिलाफ चालान आज पेश किया जा सकता है। इस कार्रवाई में शराब बनाने वाली डिस्टिलरी कंपनियों से जुड़े लोगों के साथ आबकारी विभाग के अधिकारियों के साथ मैनपॉवर कंपनी की भूमिका भी सामने आने की संभावना है। आबकारी विभाग के अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव का नाम भी जांच के दायरे में चर्चा में है। हालांकि, चालान पेश होने और आरोपियों की अंतिम सूची की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

सूत्रों के अनुसार, ईओडब्ल्यू ने शराब कारोबार से जुड़ी विभिन्न कंपनियों और उनसे संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल की है। भाटिया वाइंस, वेलकम डिस्टिलरी और कुम्हारी स्थित डिस्टिलरी से जुड़े लोगों के अलावा तत्कालीन मैनपॉवर कंपनी के अधिकारियों और आबकारी विभाग के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी बताई जा रही है। जांच एजेंसी की ओर से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ने के संकेत हैं। ऐसे में आज न्यायालय में चालान पेश होने की संभावना पर निगाहें टिकी हैं।

ED की जांच में 54 लाख, पड़ताल में दो करोड़

आशीष श्रीवास्तव की भूमिका को लेकर सामने आ रही कथित रकम का अंतर भी महत्वपूर्ण है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में उनके संबंध में 54 लाख रुपये की कथित रकम का उल्लेख किया गया था, जबकि अब ईओडब्ल्यू की पड़ताल में यह रकम करीब दो करोड़ रुपये होने की बात सामने आ रही है। दोनों जांच एजेंसियों से जुड़ी बताई जा रही इन रकमों का आधार, अवधि और गणना का तरीका आधिकारिक दस्तावेज सामने आने पर ही स्पष्ट हो सकेगा।

सूत्रों का दावा है कि राज्य उड़नदस्ता प्रभारी के रूप में कार्यकाल के दौरान श्रीवास्तव की जिम्मेदारियों के निर्वहन और शराब कारोबार में कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठे हैं। आरोप है कि जिस अवधि में अवैध गतिविधियों पर निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी थी, उस दौरान शराब सिंडिकेट से जुड़े लोगों को कथित तौर पर लाभ मिलता रहा। जांच से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इसी सिलसिले में नियमित रकम दिए जाने की व्यवस्था थी।

सूत्रों के मुताबिक, कथित लेन-देन में एपी त्रिपाठी के माध्यम से आलोक मिश्रा और संजय दीवान के जरिए हर महीने छह लाख रुपये पहुंचाए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इसके साथ ही 54 लाख रुपये और करीब दो करोड़ रुपये के अलग-अलग आंकड़ों का संबंध किन अवधि और तथ्यों से है, यह स्पष्ट होना जरूरी है। फिलहाल इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच एजेंसी के आधिकारिक दस्तावेजों और न्यायालय में पेश होने वाले चालान से ही हो सकेगी।

अब ईओडब्ल्यू की कार्रवाई पर नजर

शराब घोटाले की जांच के दौरान ईडी की कार्रवाई में भी आशीष श्रीवास्तव की भूमिका को लेकर सवाल उठने की बात सामने आई थी। उस समय आबकारी विभाग के कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई थी, लेकिन श्रीवास्तव के विरुद्ध उसी क्रम में प्राथमिकी दर्ज होने और निलंबन की कार्रवाई नहीं होने को लेकर विभागीय हलकों में चर्चा रही। अब ईओडब्ल्यू की जांच में उनकी भूमिका को लेकर संभावित कार्रवाई की चर्चा ने मामले को फिर सुर्खियों में ला दिया है।

सूत्रों के अनुसार, श्रीवास्तव के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मिलने की जानकारी भी सामने आई है। इसकी आधिकारिक पुष्टि और स्वीकृति से संबंधित दस्तावेजों का विवरण सार्वजनिक होना बाकी है। यदि चालान में उनका नाम शामिल होता है, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच एजेंसी ने उनकी कथित भूमिका और लेन-देन के आरोपों के समर्थन में कौन-कौन से साक्ष्य पेश किए हैं।

संभावित कार्रवाई से अधिकारियों में हलचल

मामले से जुड़े सूत्रों का दावा है कि संभावित कार्रवाई को देखते हुए कुछ अधिकारियों के बीच कानूनी सलाह लेने और आगे की रणनीति तय करने को लेकर हलचल है। कुछ अधिकारियों के दस दिन की छुट्टी पर जाने की तैयारी की चर्चा भी सामने आई है। हालांकि, किसी अधिकारी के गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार होने या इसी उद्देश्य से छुट्टी लेने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईओडब्ल्यू आज कितने आरोपियों के खिलाफ चालान पेश करती है और क्या इसमें डिस्टिलरी कंपनियों से जुड़े लोगों के साथ आबकारी विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी औपचारिक रूप से सामने आती है। यदि आज चालान पेश होता है, तो शराब घोटाले की जांच में यह एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगा। इससे मामले में आरोपों, कथित लेन-देन और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को लेकर आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।