कबीरधाम…छत्तीसगढ़ पुलिस की पदोन्नति प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कबीरधाम जिले में पदस्थ पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि उनके साथ जानबूझकर भेदभाव किया गया। उनका कहना है कि उनके विरुद्ध केवल विवेचना स्तर का मामला लंबित होने के बावजूद उनकी पदोन्नति रोकी गई, जबकि गंभीर आपराधिक प्रकरणों में नामजद अन्य आईपीएस अधिकारियों को पदोन्नति दे दी गई।

पुलिस अधीक्षक ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि वे वर्ष 2012 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में कबीरधाम में पदस्थ हैं। पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर उनकी संनिष्ठा प्रमाणित करते हुए 10 अक्टूबर 2024, 26 मई 2025 और 31 जुलाई 2025 को पदोन्नति की अनुशंसा की गई, लेकिन लोकायुक्त संगठन भोपाल में लंबित विवेचना को आधार बनाकर हर बार उनकी पदोन्नति रोक दी गई। उन्होंने सवाल उठाया है कि जब न तो उनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल हुआ है, न कोई विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही है और न ही कोई प्रकरण न्यायालय में लंबित है, तो उन्हें पदोन्नति से वंचित रखने का आधार क्या है।

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पत्र में एसपी छवई ने महादेव सट्टा ऐप और फोन टैपिंग जैसे संवेदनशील मामलों का हवाला देते हुए कहा है कि इन मामलों में पुलिस में प्रमोशन पर टकराव: एसपी धर्मेंद्र सिंह छवई ने सीएम को लिखा पत्र, भेदभाव का लगाया गंभीर आरोप जिन अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं और जिनकी जांच अभी चल रही है, उन्हें पदोन्नति दी गई। उन्होंने इसे नियमों की समान व्याख्या के बजाय दोहरी नीति करार दिया है और पूछा है कि यदि जांच लंबित होना पदोन्नति में बाधक है, तो यह नियम केवल उनके मामले में ही क्यों लागू किया गया।

उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद-16 के तहत अवसर की समानता के अधिकार का उल्लेख करते हुए कहा है कि यह कार्रवाई उनके मौलिक अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है। साथ ही भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 15 जनवरी 1999 को जारी पदोन्नति संबंधी दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि विवेचना स्तर का मामला किसी आईपीएस अधिकारी को वरिष्ठ वेतनमान या उच्च पद पर पदोन्नति से रोकने का आधार नहीं बन सकता।

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एसपी छवई ने यह भी कहा है कि महादेव सट्टा ऐप प्रकरण को सीबीआई को सौंपे जाने के बाद भी उनके साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है। उनका आरोप है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि पूर्वाग्रह और बदनियति से प्रेरित कार्रवाई प्रतीत होती है। उन्होंने न्याय की मांग करते हुए पत्र की प्रतिलिपि भारत सरकार के गृह मंत्रालय के सचिव और छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक को भी भेजी है।

मामले में पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कॉल को गलत नंबर बताकर काट दिया गया। इससे पहले ही उनका पत्र सार्वजनिक हो जाने के बाद पुलिस महकमे के भीतर और बाहर हलचल तेज हो गई है।

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पूरे प्रकरण ने छत्तीसगढ़ पुलिस की पदोन्नति व्यवस्था, नियमों की निष्पक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब निगाहें सरकार की प्रतिक्रिया और इस विवाद पर लिए जाने वाले अगले फैसले पर टिकी हैं।