CG  NEWS:सूरजपुर: (मनीष जायसवाल)।जिले में राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत वित्तीय वर्ष 2022-23 में की गई खरीदी को लेकर एक बड़े विवाद की पटकथा का सिर्फ ट्रेलर सामने आया है। हमर उत्थान सेवा समिति ने तात्कालीन जिला मिशन समन्वयक शशिकांत सिंह पर फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरेसी तथा टीचिंग लर्निग मटेरियल योजनाओं के लिए स्वीकृत लगभग 2 करोड़ रुपये की राशि के अनियमित उपयोग और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। समिति का कहना है कि यह राशि विकासखंड वार विद्यालयों के लिए आवंटित थी, लेकिन खरीदी प्रक्रिया को केंद्रीकृत कर नियमों के विपरीत निम्न गुणवत्ता की सामग्री की आपूर्ति कराई गई।

शिकायत में दावा किया गया है कि पूरी खरीदी प्रक्रिया जिला मिशन समन्वयक के नियंत्रण में रही और कार्यालय में पदस्थ लेखाकार की मिली भगत से भुगतान भी कर दिए गए..। इसमें कुछ राशि सीएसआईडीसी के माध्यम से खर्च दिखाने का उल्लेख है, जबकि शेष भुगतान महिला स्वयं सहायता समूह के नाम से संचालित किराना दुकानों के फर्जी बिलों से किए जाने का आरोप लगाया गया है। समिति का कहना है कि इस प्रक्रिया में लगभग 20 लाख रुपये की ऐसी भी अनियमित खरीदी की गई। जो नियम कायदों से तनिक मेल भी नहीं खाती है। ऐसा करते हुए बजट को योजनाबद्ध तरीके से खर्च किया गया, जबकि राज्य भंडार क्रय नियमों के तहत न तो खुली निविदा जारी की गई और न ही अनिवार्य विज्ञापन प्रक्रिया अपनाई गई।

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समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि क्रय समिति के सदस्य, तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी और तत्कालीन जिला पंचायत के नोडल अधिकारी होने के बावजूद तत्कालीन सीईओ ने खरीदी प्रक्रिया पर प्रभावी निगरानी नहीं रखी। आरोप है कि जिन अधिकारियों पर पर्यवेक्षण और अनुमोदन की जिम्मेदारी थी, उन्होंने या तो जानबूझकर अनियमितताओं पर मौन सहमति दी या फिर घोर लापरवाही बरती। इन तथ्यों को शिकायत में छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम, 2002 (संशोधित 2022), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियमावली के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

वहीं जिला मिशन समन्वयक शशिकांत सिंह ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि खरीदी की पूरी प्रक्रिया तत्कालीन कलेक्टर इफत आरा के निर्देशों के अनुसार अपनाई गई थी और भुगतान तत्कालीन कलेक्टर संजय अग्रवाल के कार्यकाल में उनकी जानकारी में हुआ था..। शशिकांत सिंह का दावा है कि संपूर्ण प्रक्रिया में प्रचलित नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता नहीं की गई।

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इस मामले में समिति का कहना है कि उसने कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, शिक्षा मंत्री, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों, सरगुजा संभाग आयुक्त और एंटी करप्शन ब्यूरो को लिखित शिकायत भेजी है। समिति का दावा है कि शिकायत के साथ नोटशीट, क्रय समिति की सूची और सी-मार्ट बिलों की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं, जिनके आधार पर खरीदी प्रक्रिया और भुगतान की जांच संभव है।

दूसरी ओर संबंधित अधिकारी प्रशासनिक निर्देशों और स्वीकृत प्रक्रिया का हवाला देकर स्वयं को निर्दोष बता रहे हैं। ऐसे में अब यह मामला जांच एजेंसियों के लिए अहम बन गया है, जहां निष्पक्ष जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि करोड़ों रुपये की खरीदी नियमों के तहत हुई या फिर सार्वजनिक धन के उपयोग में गंभीर अनियमितता बरती गई..।

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बताते चले की हमर उत्थान सेव समिति की ओर से शशि सिंह पर लिखी गई आरोपों की पटकथा में वे हाट टॉपिक इसलिए भी रहे क्योंकि सरकार बदल गई..। करीब चार कलेक्टर बदल गए जिला पंचायत सीईओ कलेक्टर तक बन गए और चार जिला शिक्षा अधिकारी तक बदल गए लेकिन जिला मिशन समन्वयक इस सरकार में भी करीब दो साल टिक गए…। फिलहाल वे अभी सहायक संचालक के रूप में संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय सरगुजा में पदस्थ है।समग्र शिक्षा में उनकी छवि तत्कालीन जिला कलेक्टर गौरव सिंह के समय लेकर संजय अग्रवाल तक के कार्यकाल में मिलन सार और सहज अधिकारी की मानी जाती रही है।