CG News- निलंबित कर्मचारी को दी ज्वाइनिंग और मनमर्जी से मर्ज किए स्कूल; डीपीआई ने प्रिंसिपल को जारी किया शोकॉज नोटिस

CG News-सारंगढ़-बिलाईगढ़। छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही और स्वेच्छाचारिता बरतने का एक गंभीर मामला सामने आया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ के तत्कालीन प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) पटेल के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
डीपीआई ने इस नोटिस के माध्यम से प्रभारी डीईओ पर लगे सिलसिलेवार और गंभीर आरोपों पर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में संतोषप्रद जवाब नहीं मिला, तो उनके विरुद्ध एकपक्षीय दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
निलंबन के बावजूद कर्मचारी को दी कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति
CG News-प्रभारी डीईओ पर सबसे गंभीर आरोप वरिष्ठ कार्यालय के आदेशों की अवहेलना करने का है। संयुक्त संचालक (JD) शिक्षा संभाग बिलासपुर ने सहायक ग्रेड-2 के कर्मचारी सुनील कर्ष के विरुद्ध निलंबन आदेश और आरोप पत्र जारी किया था। इसके बावजूद, प्रभारी डीईओ पटेल ने संयुक्त संचालक की अनुमति के बिना ही कर्ष को उनकी पूर्व शाला (शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, टुण्ड्री) में कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति प्रदान कर दी। इस कृत्य को विभाग ने अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा माना है।
युक्तियुक्तकरण में नियमों की धज्जियां उड़ाई
कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ की रिपोर्ट में भी प्रभारी डीईओ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। वर्ष 2025 के स्कूलों के युक्तियुक्तकरण (Rationalization) के दौरान अनुभाग स्तरीय समिति ने सिफारिश की थी कि शासकीय प्राथमिक शाला रेंजरपारा और सहसपुर के बीच की दूरी 0.8 किलोमीटर (800 मीटर) है, जो शासन द्वारा निर्धारित 500 मीटर की सीमा से अधिक है।
इस कारण रेंजरपारा स्कूल को मर्ज नहीं किया जाना चाहिए था। लेकिन प्रभारी डीईओ ने समिति के प्रस्ताव और शासन के नियमों को ताक पर रखकर रेंजरपारा स्कूल को सहसपुर में मर्ज कर दिया। कलेक्टर ने इस नियम विरुद्ध कार्रवाई के लिए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रस्ताव भेजा है।
अधिकारों का दुरुपयोग और अन्य अनियमितताएं
नोटिस में अन्य आरोपों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें शामिल हैं:
सेवा पुस्तिका में हेरफेर: प्रभारी डीईओ के पद पर रहते हुए अपनी सेवा पुस्तिका संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय को प्रेषित करने के बजाय, उन्होंने स्वयं ही उसमें प्रविष्टियां कीं।
अवैध पदस्थापना: अपने अधिकारों की सीमा से बाहर जाकर सुषमा पटेल नामक कर्मचारी की सेजेस (SEGES) विद्यालय में पदस्थापना की।
पुराने नोटिस की अनदेखी: इससे पहले संयुक्त संचालक द्वारा जारी किए गए नोटिस का भी उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया था।
होगी एकपक्षीय कार्रवाई
डीपीआई ने स्पष्ट किया है कि प्रभारी डीईओ का यह कृत्य ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965’ के नियम-3 के विपरीत गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। विभाग ने ‘छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966’ के तहत कार्रवाई की तैयारी कर ली है। यदि 7 दिनों के भीतर लिखित प्रतिवाद प्राप्त नहीं होता है, तो प्रशासन द्वारा उनके विरुद्ध कड़ी एकपक्षीय कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।




