बिलासपुर।ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा और दूसरे खेलों के जरिए संगठित तरीके से रकम जुटाने के आरोप में गिरफ्तार 12 आरोपियों की जमानत छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल के सिंगल बेंच ने खारिज कर दिया है।

मिली जानकारी मुताबिक कोर्ट ने एक ही अपराध से जुड़े चार अलग-अलग जमानत आवेदनों पर सुनवाई करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया जांच में अलग-अलग समूहों के जरिए ऑनलाइन सट्टा चलाने, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल और रकम के लेन-देन से जुड़े पर्याप्त सामग्री सामने आई है।

मीडिया रिपोर्ट अनुसार मामले की जांच अभी जारी है, इसलिए इस स्तर पर नियमित जमानत देना उचित नहीं है।

मामला भाटापारा शहर थाने में दर्ज का है। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 111, 314, 317(2), 317(4), छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम की धारा 7 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं 66 सी और 66 डी के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार 4 अप्रैल 2026 को भाटापारा रेलवे स्टेशन के पास अजय बत्रा को पकड़ा गया था। उसके मोबाइल में रियलप्ले 9 और रूवीबेट नाम के ऑनलाइन पैनल से संबंधित सामग्री, सट्टे के आंकड़े और लेन-देन के स्क्रीनशॉट मिले। पुलिस ने उसके पास से 5,780 रुपये और मोबाइल फोन जब्त किया था।

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को हिमाचल प्रदेश के परवाणू से संचालित अलग-अलग समूहों के जरिए ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा और दूसरे खेल चलाए जाने की जानकारी मिली। पुलिस ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, राउटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किया । इनके अलावा सट्टे की रकम जमा और ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की भी जांच की जा रही है। जब्त उपकरणों को रायपुर स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया है।

आरोपियों की ओर से ये दी गई दलीलें

याचिका की सुनवाई जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल के सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने कहा, याचिकाकर्ताओं को मुख्य रूप से सह आरोपियों के बयान के आधार पर गिरफ्तार किया गया है, जो अकेले पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। मोबाइल और अन्य उपकरणों की जांच अभी बाकी है। किसी आरोपी को सट्टा मंच का संचालक या मालिक साबित करने वाली सामग्री नहीं है। अधिवक्ता ने कहा, सभी लंबे समय से जेल में हैं और आरोप पत्र पेश हो चुका है। इसलिए जमानत दी जानी चाहिए। अधिवक्ता ने कोर्ट को जानकारी देते हुए बताया, मामले में पहले गिरफ्तार अजय बत्रा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है।

राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि जांच में अलग-अलग समूहों के जरिए संगठित ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क चलाने के प्रथम दृष्टया प्रमाण मिले हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बैंक खातों से जुड़े साक्ष्य मिले हैं तथा रकम के लेन-देन और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की जांच जारी है। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया, इसी मामले में चार अन्य सह आरोपियों की जमानत, 17 अगस्त 2026 को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था।

याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा, जमानत के स्तर पर साक्ष्यों की बारीकी से जांच या उनकी स्वीकार्यता का अंतिम निर्णय नहीं किया जा सकता। सह आरोपियों के बयान को अन्य जब्त सामग्री, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और वित्तीय लेन-देन से अलग करके नहीं देखा जा सकता

अजय बत्रा को मिली जमानत का लाभ भी सभी आरोपियों को स्वतः नहीं दिया जा सकता।

कोर्ट ने नेटवर्क की गंभीरता, अंतरराज्यीय स्तर पर गतिविधियों और जांच जारी रहने को देखते हुए सद्दाम हुसैन, अजीबुल रहमान, शिवम, दीपक उर्फ दीपू चौहान, अनिकेत त्यागी, मनु, गुलशन कुमार, राहुल सरमल, रितिक कुमार, लवप्रीत सिंह, मुकेश सोनी और दीपक कुमार पौडेल की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।