CG News/छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक कथित ‘झोलाछाप’ डॉक्टर की लापरवाही ने एक तीन साल के मासूम बच्चे की जान ले ली। बुखार का इलाज कराने आए बालक को बिना किसी वैध योग्यता के गलत इंजेक्शन लगाने के आरोप में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी बालेश्वर सिंह को गिरफ्तार कर लिया है।

न्यायालय से न्यायिक रिमांड मिलने के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया है। यह मामला जिले के सरनाडीह क्षेत्र का है, जिसने एक बार फिर बिना डिग्री प्रैक्टिस करने वाले फर्जी डॉक्टरों के खतरे को उजागर कर दिया है।

घटना के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार, 19 अगस्त की सुबह करीब 7 बजे रमेश चेरवा अपने तीन वर्षीय पुत्र अभी चेरवा को तेज बुखार होने के कारण उपचार के लिए आरोपी बालेश्वर सिंह के पास ले गया था। आरोप है कि बालेश्वर सिंह ने बालक की स्थिति को समझे बिना उसे एक इंजेक्शन लगा दिया।

इंजेक्शन लगने के कुछ ही देर बाद बालक की तबीयत अचानक और ज्यादा बिगड़ने लगी। घबराए परिजन उसे आनन-फानन में जिला अस्पताल बलरामपुर ले जाने के लिए निकले, लेकिन बच्चे की हालत इतनी नाजुक हो गई थी कि उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। मासूम की मौत के बाद परिजनों में कोहराम मच गया और मामले की सूचना पुलिस को दी गई।

सूचना मिलते ही पुलिस ने मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी बालेश्वर सिंह के पास चिकित्सा कार्य करने के लिए कोई भी अनिवार्य योग्यता, मेडिकल डिग्री या सरकारी पंजीयन नहीं था।

इसके बावजूद वह लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हुए उनका इलाज कर रहा था। पुलिस ने गवाहों के बयान और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105, 271, 318 और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 27 के तहत कड़ा मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस ने 21 अगस्त को आरोपी बालेश्वर सिंह को गिरफ्तार कर उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया और उसे कोर्ट में पेश किया। प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए चेतावनी दी है कि बिना वैध लाइसेंस और डिग्री के क्लीनिक चलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत विवेचना जारी है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पीड़ित परिवार को न्याय मिले।