CG News/अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में शिक्षा विभाग का एक नोटिस चर्चा का विषय बन गया है। एक शिक्षक की गिरफ्तारी और जेल में निरुद्ध रहने की सूचना कथित तौर पर वर्षों की देरी से मिलने के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने मणीपुर थाना प्रभारी को सीधे स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर दिया है।

नोटिस में थाना प्रभारी से देरी का कारण, पूर्व में सूचना भेजे जाने की स्थिति और इसके लिए जिम्मेदारी तय किए जाने से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। इतना ही नहीं, DEO कार्यालय ने जवाब तत्काल और प्राथमिकता के आधार पर देने को कहा है। इस कार्रवाई को लेकर शिक्षा विभाग में सवाल उठने लगे हैं।

मामले की पृष्ठभूमि में कलेक्टर अजीत वसंत की सख्ती बताई जा रही है। कलेक्टर के निर्देशों के बाद अंबिकापुर के DEO ने पहले उदयपुर के तत्कालीन विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO), जो वर्तमान में MCB जिले में DEO के पद पर पदस्थ हैं, को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। इसके बाद मणीपुर थाना प्रभारी को भी स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया। विभागीय हलकों में इस बात पर चर्चा है कि सूचना में देरी के लिए जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

DEO कार्यालय की ओर से जारी नोटिस में प्रधान पाठक विजय कुमार यादव का उल्लेख किया गया है।

वे शासकीय प्राथमिक शाला पेण्डरखी, विकासखंड उदयपुर, जिला सरगुजा में पदस्थ थे। नोटिस के अनुसार, उनके खिलाफ मणीपुर थाने में अपराध क्रमांक 499/2019 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 147, 148, 149, 294, 323 और 307 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने उन्हें 18 अगस्त 2019 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था।

नोटिस में आगे कहा गया है कि सक्षम सत्र न्यायालय से दोषसिद्ध होने के बाद शिक्षक 3 जनवरी 2026 से 9 अक्टूबर 2026 तक केंद्रीय जेल अंबिकापुर में निरुद्ध रहे। DEO कार्यालय का दावा है कि गिरफ्तारी और जेल में रहने से संबंधित सूचना विभाग को 13 अक्टूबर 2026 को मिली। नोटिस में इस सूचना को लगभग सात साल की देरी से प्राप्त होना बताया गया है।

DEO ने नोटिस में शासन के प्रशासनिक और विधिक निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि किसी शासकीय सेवक की गिरफ्तारी होने या उसे 48 घंटे से अधिक समय तक अभिरक्षा में रखे जाने पर संबंधित पुलिस थाना अथवा जांच एजेंसी को इसकी सूचना उसके नियोक्ता, नियंत्रणकर्ता प्राधिकारी या विभागाध्यक्ष को भेजनी होती है। इससे सेवा नियमों के तहत समय पर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

थाना प्रभारी से तीन प्रमुख बिंदुओं पर जवाब मांगा गया है। पहला, वर्ष 2019 में शिक्षक की गिरफ्तारी और जनवरी 2026 से जेल में निरुद्ध रहने की सूचना विभाग को भेजने में इतनी देरी क्यों हुई? दूसरा, क्या गिरफ्तारी या सत्र न्यायालय से दोषसिद्धि के समय शिक्षा विभाग अथवा BEO उदयपुर को कोई लिखित या मौखिक सूचना दी गई थी? यदि सूचना भेजी गई थी, तो उसका जावक क्रमांक, दिनांक और प्राप्ति की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने को कहा गया है।

तीसरे बिंदु में DEO ने पूछा है कि इतने वर्षों तक सूचना नहीं मिलने के कारण शिक्षक के विरुद्ध सेवा नियमों के तहत समय पर निलंबन या विभागीय कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके लिए थाना स्तर पर क्या जिम्मेदारी निर्धारित की गई है? नोटिस में संबंधित जानकारी तत्काल और प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि वरिष्ठ अधिकारियों और शासन को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जा सके।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक अहम सवाल खड़ा कर दिया है कि यदि किसी शासकीय कर्मचारी की गिरफ्तारी और जेल में निरुद्ध रहने की सूचना समय पर संबंधित विभाग को नहीं मिली, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है? वहीं, थाना प्रभारी को शिक्षा विभाग की ओर से जारी इस तरह के स्पष्टीकरण नोटिस को लेकर भी चर्चा है। अब देखना होगा कि पुलिस की ओर से क्या जवाब दिया जाता है और विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है।