CG Liquor Scam-रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में लगातार नए खुलासे हो रहे हैं। EOW ने घोटाले में संलिप्तता और कमीशनखोरी के आरोप में चैतन्य बघेल और दीपेन चावड़ा को विशेष अदालत में पेश किया है। जांच एजेंसी ने दोनों आरोपियों को छह दिन की पुलिस रिमांड पर लेने की मांग की है।

दीपेन चावड़ा पहले से ही नान घोटाले में जेल में बंद है और अब उसे आबकारी घोटाले में औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया जाएगा। माना जा रहा है कि चावड़ा से पूछताछ में घोटाले के कई और राज खुल सकते हैं।

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चैतन्य बघेल को EOW ने घोटाले का मास्टर माइंड बताया है। आरोप है कि उसने बिग बास नामक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए पूरे रैकेट को संगठित गिरोह के रूप में चलाया। इस ग्रुप में दो पूर्व IAS अफसरों के अलावा कारोबारी अनवर ढेबर और अन्य प्रभावशाली लोग जुड़े हुए थे। आरोप है कि चैतन्य को एक हजार करोड़ रुपये कमीशन के रूप में मिले, जिसे उसने रियल एस्टेट में खपाकर ब्लैक मनी को व्हाइट किया।

ED की जांच में सामने आया कि घोटाले की नींव फरवरी 2019 में रखी गई थी। कारोबारी अनवर ढेबर ने जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में डिस्टलरी मालिकों और आबकारी विभाग से जुड़े अधिकारियों की बैठक बुलाई थी।

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इसी बैठक में यह तय हुआ कि हर पेटी शराब पर कमीशन लिया जाएगा और इसके बदले डिस्टलरी मालिकों को दर बढ़ाने का आश्वासन दिया गया। सरकारी कागजों में खपत दर्ज न करने और नकली होलोग्राम लगाकर शराब सप्लाई करने की पूरी प्लानिंग इसी बैठक में की गई थी।

ED की चार्जशीट के मुताबिक, घोटाले की राशि 2,174 करोड़ रुपये से अधिक है। इसमें नेताओं और मंत्रियों को सबसे बड़ा हिस्सा यानी 1,392 करोड़ रुपये मिला। वहीं डिस्टलरी मालिकों को 358 करोड़, अनवर ढेबर और अनिल टुटेजा को 181 करोड़, आबकारी विभाग और जिला अधिकारियों को करीब 90-90 करोड़ रुपये मिले।

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रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव, कबीरधाम, बालोद, महासमुंद, धमतरी, बलौदाबाजार, गरियाबंद, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, कोरबा, बेमेतरा और रायगढ़ जैसे जिलों में नकली होलोग्राम वाली शराब बेची जाती थी। शुरुआत में हर महीने 200 ट्रक शराब निकलते थे, लेकिन बाद में यह आंकड़ा बढ़कर 400 ट्रक हो गया। तीन साल में 60 लाख से ज्यादा पेटियां अवैध रूप से बेची गईं।

इस पूरे सिंडिकेट में IAS अनिल टुटेजा को संरक्षक की भूमिका में बताया गया है। अनवर ढेबर ने सिंडिकेट का गठन किया और पैसों के बंटवारे की रूपरेखा तय की। एपी त्रिपाठी पर आबकारी विभाग में फर्जी ठेके दिलाने का आरोप है। वहीं अरविंद सिंह, विकास अग्रवाल, त्रिलोक सिंह ढिल्लन और अन्य कारोबारी नकली बोतल, होलोग्राम सप्लाई और कैश कलेक्शन की जिम्मेदारी संभालते थे।