
शिमला।शिमला में आयोजित जॉइंट एक्शन कमेटी (जेएसी) की महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के शिक्षकों ने कैरियर उन्नति योजना (सीएएस) के तहत लंबित पदोन्नतियों को लेकर गहरा असंतोष जताया है।
बैठक में सर्वसम्मति से इसे शिक्षकों के अधिकारों का उल्लंघन और शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया गया। बड़ी संख्या में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों की भागीदारी से यह स्पष्ट हुआ कि यह मुद्दा अब पूरे प्रदेश की उच्च शिक्षा प्रणाली को प्रभावित कर रहा है।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सीएएस के तहत पदोन्नति केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह शिक्षकों के शैक्षणिक योगदान, शोध कार्य और अनुभव का सम्मान भी है।
लंबे समय से पदोन्नतियों का लंबित रहना न केवल शिक्षकों के मनोबल को प्रभावित कर रहा है, बल्कि इसका सीधा असर शिक्षा की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है।
जेएसी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि सीएएस को समय पर लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है। समिति ने आरोप लगाया कि शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिसे उन्होंने “कुंभकर्णी नींद” की संज्ञा दी।
शिक्षकों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो योग्य और प्रतिभाशाली शिक्षकों में निराशा बढ़ेगी और संस्थानों की साख पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
इस मुद्दे को लेकर जेएसी ने आंदोलन को तेज करने का संकेत देते हुए 11 मई को प्रदेशभर के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शैक्षणिक कार्यों के पूर्ण बहिष्कार का निर्णय लिया है। इस दिन शिक्षक कक्षाओं, परीक्षाओं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों से दूर रहकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
जॉइंट एक्शन कमेटी के सदस्य प्रोफेसर डॉ. नितिन व्यास ने सभी शिक्षकों से एकजुट होकर आंदोलन में भाग लेने की अपील की है। साथ ही उन्होंने छात्र समुदाय और समाज के अन्य वर्गों से भी समर्थन की मांग की है।





