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सुशासन तिहार में व्यस्त अफसर, बिलासपुर अंधेरे में—24 घंटे बाद भी बिजली नहीं, सिस्टम फेल

सुशासन तिहार’ में डूबा सिस्टम, बिलासपुर अंधेरे में—आंधी के 24 घंटे बाद भी बिजली गायब

बिलासपुर…मंगलवार शाम आई 15 मिनट की तेज आंधी ने शहर की बिजली व्यवस्था की असल तस्वीर सामने रख दी। पेड़ गिरे, तार टूटे और पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया। 24 घंटे बाद भी हालात सामान्य नहीं—और इसी बीच पूरा सिस्टम सुशासन तिहार में व्यस्त दिख रहा है।

सबसे चौंकाने वाली बात—कलेक्ट्रेट परिसर, कंपोजिट बिल्डिंग और आसपास के इलाके तक लगातार बिजली संकट से जूझ रहे हैं। लाइट आती है तो चंद मिनट टिमटिमाकर चली जाती है। नेहरू चौक से उसलापुर फाटक तक कई कॉलोनियां—नेहरू नगर, मंगला चौक, अमलतास कॉलोनी, नंद विहार, महावीर नगर, मुंगेली नाका—अब भी इंतजार में हैं।

बिजली विभाग को कॉल करने पर एक ही जवाब—“सब सुशासन तिहार में व्यस्त हैं, 1-2 घंटे में आ जाएगी।” यह ‘1-2 घंटे’ पूरे दिन में बदल चुका है। वरिष्ठ अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचते दिख रहे हैं। फॉल्ट कहां है, कब ठीक होगा—कोई ठोस जानकारी नहीं।

मेंटेनेंस के दावे धराशायी

हर साल मानसून मेंटेनेंस के नाम पर करोड़ों खर्च होते हैं—पेड़ कटते हैं, लाइन क्लियर करने के दावे होते हैं। लेकिन एक आंधी में पेड़ों के साथ दावे भी गिर गए। तार टूटे, सप्लाई ठप हुई और व्यवस्था की तैयारी पर सवाल खड़े हो गए।

लाइनमैन मैदान में, सिस्टम गायब

जगह-जगह लाइनमैन खंभों पर काम करते दिखे—मैदान में मेहनत नजर आई। लेकिन समन्वय और नेतृत्व की कमी साफ दिखी। प्रमुख अधिकारियों तक कॉल नहीं लग रहा, और जिनसे बात हो रही है, उनके पास भी जवाब नहीं।

असर: पानी रुका, काम ठप

बिजली न होने से पानी के पंप बंद पड़े हैं। घरों से लेकर दफ्तरों तक कामकाज ठप है। इनवर्टर जवाब दे रहे हैं, लोग अंधेरे में दिन काट रहे हैं। शहर का बड़ा हिस्सा बेसिक सुविधा के लिए जूझ रहा है।

कटाक्ष नहीं, चेतावनी

एक तरफ मंचों से सुशासन के दावे, दूसरी तरफ जमीनी हकीकत—अंधेरा। सवाल सीधा है: क्या यही सुशासन है, जहां कलेक्ट्रेट बेल्ट तक 24 घंटे में सप्लाई बहाल नहीं हो पाती? या फिर यह संकेत है कि सिस्टम की प्राथमिकताएं उलट चुकी हैं?

अब जवाब जरूरी

यह मामला सिर्फ बिजली कटौती का नहीं, जवाबदेही का है। फॉल्ट लोकेशन, रिस्टोरेशन टाइमलाइन और जिम्मेदारी—तीनों पर स्पष्टता जरूरी है। वरना ‘तिहार’ खत्म होगा, लेकिन भरोसे का अंधेरा लंबा चलेगा।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।

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