शिक्षा विभाग में ‘पिछली खिड़की’ का खेल बेनकाब—200 ट्रांसफर संशोधन और 30 लाख घोटाले पर कलेक्टर का जेडी को अल्टीमेटम
शिक्षा विभाग में ‘नजराना सिस्टम’ का पर्दाफाश—जेडी को 3 दिन की मोहलत, बड़े एक्शन के संकेत

बिलासपुर… शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण में नियमों की अनदेखी और कोटा विकासखंड में सामने आए करीब 30 लाख के ‘भृत्य घोटाले’ पर कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया है। अंकित गौरहा की शिकायत के बाद संयुक्त संचालक, बिलासपुर को स्मरण-पत्र जारी कर तीन दिनों के भीतर अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपने का अल्टीमेटम दिया गया है।
विभाग में घमासान, शिकायत पर सीधी दखल
न्यायधानी में शिक्षा विभाग के भीतर चल रहे घमासान और कथित भ्रष्टाचार ने अब गंभीर रूप ले लिया है। दस्तावेजों के साथ की गई शिकायत के बाद कलेक्टर ने सीधे हस्तक्षेप करते हुए संयुक्त संचालक यानी जॉइंट डायरेक्टर शिक्षा से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है।
नियम दरकिनार, ‘नजराने’ से पोस्टिंग का खेल
बिलासपुर जिले के शिक्षा विभाग में नियमों से ज्यादा ‘नजराने’ की चर्चा तेज है। युक्तियुक्तकरण संशोधन के मामले में की गई शिकायत में जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर आरोप है कि कलेक्टर और जिला स्तरीय समिति को दरकिनार कर मनमाने ढंग से शिक्षकों की पोस्टिंग का खेल खेला गया।
200 प्रकरणों में संशोधन, प्रक्रिया को नजरअंदाज
नियमों के अनुसार युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया का अंतिम अनुमोदन कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति करती है, लेकिन बिलासपुर में इस प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए लगभग 200 प्रकरणों में बिना सक्षम अनुमति के संशोधन कर दिए गए। इन फाइलों में न तो वैध नोटशीट मौजूद है और न ही सक्षम अधिकारियों के हस्ताक्षर दिखाई देते हैं। स्थिति यह रही कि शिक्षकों को मौखिक निर्देश देकर कार्यभार ग्रहण करा दिया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को कागजी जांच से बचाया जा सके। यह पूरा मामला ‘पिछली खिड़की’ से किए गए तबादलों जैसा नजर आता है।
प्रभारी डीईओ और करीबी की भूमिका संदिग्ध
इस पूरे प्रकरण में वर्तमान प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और उनके करीबियों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि मूल नियमों की अनदेखी कर चहेते शिक्षकों को लाभकारी स्थानों पर पदस्थ किया गया और पूरी प्रक्रिया को पर्दे के पीछे संचालित किया गया।
डीपीआई कनेक्शन: संरक्षण से जांच प्रभावित
मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आ रहा है कि रायपुर स्थित डीपीआई में पदस्थ एक बड़ा पदाधिकारी लगातार जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और करीबियों को संरक्षण दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यही कारण है कि हर बार जांच समितियों की रिपोर्ट उसी दिशा में तैयार होती है, जिससे जिम्मेदार अधिकारी और उनका नेटवर्क बच निकलता है।
कलेक्टर का TL आदेश, तीन दिन में जवाब तलब
कलेक्टर कार्यालय ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए TL नंबर 19185/25-03-2026 के तहत संयुक्त संचालक शिक्षा को निर्देशित किया है कि जांच कर तीन दिनों के भीतर प्रतिवेदन प्रस्तुत करें। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि बिना कलेक्टर अनुमोदन के संशोधन आदेश कैसे जारी हुए, फाइलों में आवश्यक दस्तावेज और हस्ताक्षर क्यों नहीं हैं, और क्या इन निर्णयों के पीछे आर्थिक लाभ जुड़ा हुआ है—इन सभी बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब देना होगा।
30 लाख का ‘भृत्य घोटाला’ जांच के दायरे में
इसी के साथ कोटा विकासखंड से जुड़ा 30 लाख का ‘भृत्य घोटाला’ भी जांच के दायरे में है। शिकायत में उल्लेख है कि विकासखंड शिक्षा अधिकारी रहते हुए विजय टांडे के कार्यकाल में एक भृत्य देवेन्द्र कुमार पालके के खाते में ‘वर्दी धुलाई’ और अन्य भत्तों के नाम पर करीब 29.64 लाख रुपये का भुगतान किया गया। सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच हर महीने 4 लाख रुपये से अधिक की राशि एक चपरासी को मिलना सामान्य प्रक्रिया से परे माना जा रहा है और बिना उच्च स्तर के संरक्षण के इसे संभव नहीं माना जा रहा।
निलंबन के बाद भी बड़े चेहरे सुरक्षित?
मामला सामने आने के बाद संबंधित क्लर्क और भृत्य को निलंबित किया गया, लेकिन मुख्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं होना कई सवाल खड़े करता है। वर्तमान बीईओ ने कलेक्टर के निर्देश के बाद थाना कोटा में अपराध दर्ज कराया है, वहीं शिकायत में जिला कोषालय बिलासपुर के कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर भी संदेह जताया गया है।
पुराने गबन मामलों में भी बचते रहे जिम्मेदार
इससे पहले भी सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी राजेश कुमार प्रताप बाली पर लाखों के गबन के आरोप सामने आए थे, लेकिन उस मामले में भी विभागीय स्तर पर मुख्य जिम्मेदारों को बचा लिया गया।
स्मरण-पत्र से सख्ती, अब देरी नहीं
कलेक्टर ने दोनों मामलों में संयुक्त संचालक को स्मरण-पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि जांच में किसी भी प्रकार की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। तीन कार्य दिवसों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश के साथ प्रशासन ने संकेत दे दिए हैं कि अब मामले को दबाने की गुंजाइश नहीं है।
सूत्रों के अनुसार संयुक्त संचालक कार्यालय में रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है और यदि गड़बड़ी की पुष्टि होती है, तो यह शिक्षा विभाग में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की शुरुआत साबित हो सकती है।





