अशोक खराट कांड ने देश को शर्मसार किया: बिलासपुर में राष्ट्रीय महिला आयोग अध्यक्ष का बड़ा बयान… बाबाओं के जाल में फंस रहीं महिलाएं, सावधान रहने की जरूरत
नासिक कांड पर राष्ट्रीय महिला आयोग का सख्त संदेश: ‘अंधश्रद्धा महिलाओं को अपराध की खाई में धकेल रही, ऐसे बाबाओं से रहें सावधान

बिलासपुर.. राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया किशोर रहाटकर के बिलासपुर दौरे ने महिला सुरक्षा, अंधश्रद्धा और व्यवस्था की जवाबदेही पर तीखी बहस छेड़ दी।

मंथन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक और जनसुनवाई में कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसपी रजनेश सिंह, पुलिस व प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रतिनिधि और विभिन्न इकाइयों के अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में महिला अपराध, शिकायत निस्तारण, पीड़ित सहायता और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई।
नंबर से नहीं, हर राज्य के अपने आयाम
पत्रकारों के सवाल पर कि किन राज्यों से आयोग को सबसे ज्यादा शिकायतें मिलती हैं और क्या वहीं अपराध भी अधिक हैं—रहाटकर ने तुलना की राजनीति से दूरी बनाई। उन्होंने कहा, सिर्फ आंकड़ों से तस्वीर तय नहीं होती। बड़े राज्यों में संख्या ज्यादा दिखती है, छोटे राज्यों में कम—लेकिन पीड़ा हर जगह समान है। हर राज्य के अपने-अपने चैलेंज हैं, इसलिए सीधी तुलना ठीक नहीं।
हर साल एक लाख से ज्यादा शिकायतें
अध्यक्ष ने बताया कि आयोग के पास देशभर से हर साल एक लाख से ज्यादा शिकायतें आती हैं। हर महिला दिल्ली नहीं आ सकती, इसलिए आयोग खुद उनके पास जा रहा है—इसी सोच के साथ जनसुनवाई मॉडल को विस्तार दिया जा रहा है, ताकि दूरदराज क्षेत्रों की महिलाएं भी सीधे अपनी बात रख सकें और त्वरित राहत पा सकें।
शिकायत बनाम FIR: जवाब में व्यवस्था पर जोर
पत्रकारों ने आयोग के पास आने वाली शिकायतों और पुलिस में दर्ज एफआईआर के बीच अंतर को लेकर भी सवाल उठाया। इस पर रहाटकर ने स्पष्ट किया कि आयोग का दायरा अलग है और कई मामले ऐसे होते हैं जो पहले आयोग तक पहुंचते हैं, फिर संबंधित एजेंसियों तक जाते हैं। उन्होंने कहा, जरूरी यह है कि हर शिकायत को गंभीरता से लिया जाए और उसे उचित मंच तक पहुंचाया जाए, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके।
हाई-रिस्क जोन” की धारणा खारिज,—विकृति हर जगह
राज्यवार हाई-रिस्क जोन के सवाल पर रहाटकर ने स्पष्ट कहा, ऐसा कोई एक क्षेत्र नहीं जहाँ खतरा सीमित हो। जहाँ विकृति है, वहीं अपराध है। इसलिए फोकस पूरे समाज पर होना चाहिए, न कि किसी एक भूगोल पर।
अंधश्रद्धा पर चोट: “सोच-समझकर भरोसा करें
दौरे का सबसे तीखा संदेश अंधश्रद्धा पर आया।
रहाटकर ने कहा, विश्वास जरूरी है, लेकिन अंधानुकरण नहीं। महिलाओं को हर जगह सावधानी और समझदारी से निर्णय लेना होगा। समाज को भी इस विषय पर लगातार जागरूकता बढ़ानी होगी।
अशोक खराट मामला: “शर्मसार करने वाली घटना
नासिक के चर्चित अशोक खराट प्रकरण पर अध्यक्ष ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, यह घटना पूरे समाज को शर्मसार करती है और गहरी पीड़ा देती है। पढ़े-लिखे लोग भी ऐसे जाल में फंस रहे हैं, यह चिंता का विषय है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि ऐसे तथाकथित बाबाओं से सावधान रहना जरूरी है—चाहे वे जेल में हों या बाहर।
महिलाएं सिर्फ सहभागी नहीं, नेतृत्वकर्ता हैं
महिला आरक्षण पर सवाल आया तो रहाटकर ने राजनीतिक टिप्पणी से परहेज किया, लेकिन संदेश स्पष्ट रखा। उन्होंने कहा, देश की महिलाएं हमेशा नेतृत्व करती रही हैं—चाहे इतिहास हो या वर्तमान। पंचायतों में 33 प्रतिशत से बढ़कर 50 प्रतिशत तक आरक्षण के बाद महिलाओं ने शानदार काम किया है। अब राष्ट्रीय स्तर पर भी उन्हें पूरा अवसर मिलना चाहिए।
जागरूकता ही सबसे बड़ी सुरक्षा
अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि कानून और संस्थाएं जरूरी हैं, लेकिन असली बदलाव जागरूकता और सोच में बदलाव से आएगा। बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि महिला संबंधित मामलों में संवेदनशीलता, त्वरित कार्रवाई और फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए, ताकि शिकायत केवल कागजों तक सीमित न रहे बल्कि पीड़िता को वास्तविक न्याय मिल सके।





