बिलासपुर– छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अधिवक्ता द्वारा की गई न्यायालय की अवमानना पर बिना शर्त माफी स्वीकार करते हुए ‘क्षमा’ की अवधारणा पर गहन टिप्पणी की है।

अधिवक्ता सेमसन सेमुअल मसीह ने 3 जुलाई को अदालत में यह टिप्पणी की थी कि उन्हें “इस कोर्ट से न्याय नहीं मिलेगा”, जिसे अदालत ने अवमानना माना। पेशी के दौरान अधिवक्ता ने हलफनामे के माध्यम से बिना शर्त माफी मांगी और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न करने का आश्वासन दिया।

जस्टिस राकेश मोहन पाण्डेय ने अपने आदेश में कहा, “क्षमा एक आंतरिक यात्रा है। यह नकारात्मकता को त्यागकर भावनात्मक बोझ से मुक्ति पाने और उपचार की दिशा में बढ़ने का प्रतीक है।”

कोर्ट ने माफी को वास्तविक मानते हुए स्वीकार कर लिया, और आदेश की प्रति मुख्य न्यायाधीश की डिवीजन बेंच को भेज दी गई है।