रायपुर। 27 अक्टूबर 2026|भारत में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने एक बेहद चिंतनीय तस्वीर पेश करते हुए बड़ा कदम उठाया है। कड़े कानून-कायदों के दावों के बावजूद आयोग ने साफ कर दिया है कि आज भी महिलाएं न तो अपने दफ्तरों में महफूज हैं और न ही सड़कों पर चलने में सुरक्षित महसूस कर रही हैं। इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए आयोग ने केंद्र सरकार के 10 प्रमुख मंत्रालयों, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और देश के सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को हिलाकर रख देने वाला नया परामर्श (एडवाइजरी) जारी कर दिया है।

आंकड़ों ने उड़ाए होश: 4.4 लाख अपराध दर्ज, फिर भी काम की मजबूरी

एनएचआरसी ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखते हुए बताया कि सितंबर 2026 के ‘आवधिक श्रम बल भागीदारी सर्वे’ के मुताबिक देश के वर्कफोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 34.6 फीसदी हो चुकी है। यानी हर क्षेत्र में महिलाएं कदम से कदम मिलाकर काम कर रही हैं। लेकिन दूसरी तरफ राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की साल 2026 की रिपोर्ट देश के माथे पर बड़ा कलंक लगाती है। इस रिपोर्ट के अनुसार देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4.4 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। आयोग ने दोटूक कहा कि अगर महिलाओं को सुरक्षा की गारंटी नहीं मिली, तो वे अपनी पूरी क्षमता के साथ देश के विकास में योगदान नहीं दे पाएंगी।

महिला बाल विकास से लेकर गृह और स्वास्थ्य मंत्रालय तक को भेजा गया अल्टीमेटम

मानव अधिकार आयोग ने इस मामले में किसी एक विभाग को नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है। जिन 10 केंद्रीय मंत्रालयों को यह परामर्श जारी किया गया है, उनमें महिला एवं बाल विकास, गृह, शिक्षा, सूचना एवं प्रसारण, श्रम एवं रोजगार, कॉरपोरेट मामले, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, आवासन व शहरी कार्य और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय रेलवे में रोजाना सफर करने वाली करोड़ों महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड को भी सख्त हिदायत भेजी गई है।

8 मोर्चों पर फोकस: साइबर क्राइम से लेकर पुलिस सुधार तक का प्लान

एनएचआरसी का यह परामर्श मुख्य रूप से आठ बड़े संवेदनशील मुद्दों पर केंद्रित है। इनमें सार्वजनिक स्थानों और दफ्तरों में यौन उत्पीड़न के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाना, सीसीटीवी और रोशनी जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुधारना, घटना के वक्त आसपास मौजूद चश्मदीदों को मदद के लिए प्रेरित करना, पुलिस की कार्यशैली को संवेदनशील बनाना, पीड़तिों को तुरंत सहायता पहुंचाना, तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम कसना और दीर्घकालिक कानूनी सुधार शामिल हैं।

60 दिनों का अल्टीमेटम: ‘बताएं अब तक क्या एक्शन लिया?’

आयोग ने केवल कागजी सलाह जारी करके पल्ला नहीं झाड़ा है, बल्कि सभी संबंधित मंत्रालयों, रेलवे और राज्य सरकारों को सीधी चेतावनी दी है। एनएचआरसी ने इन सिफारिशों को तुरंत जमीन पर लागू करने का निर्देश दिया है। साथ ही सख्त अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगले 2 महीने के भीतर ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ दाखिल करके आयोग को यह बताया जाए कि महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के लिए धरातल पर क्या-क्या कदम उठाए गए हैं।

शीर्ष 5 राज्यों की स्थिति: उत्तर प्रदेश से मध्य प्रदेश तक खौफनाक मंजर

देश में महिलाओं के खिलाफ दर्ज कुल मामलों के विश्लेषण से पता चलता है कि सर्वाधिक अपराधों के साथ उत्तर प्रदेश (लगभग 66,398 मामले) पहले स्थान पर बना हुआ है, जबकि दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र (लगभग 47,954 मामले) और तीसरे पायदान पर राजस्थान (लगभग 36,563 मामले) मौजूद हैं। इसके बाद चौथे स्थान पर पश्चिम बंगाल (लगभग 34,691 मामले) का नंबर आता है और पांचवें स्थान पर मध्य प्रदेश (लगभग 32,342 मामले) दर्ज किया गया है। इन पांचों राज्यों से ही देश भर के कुल 4.4 लाख मामलों में से 50 प्रतिशत से अधिक मामले सामने आए हैं।

छत्तीसगढ़ का आंकड़ा और वर्तमान स्थिति

छत्तीसगढ़ में महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़ों में उतार-चढ़ाव और सुधार की स्थिति इस प्रकार है

कुल दर्ज मामले: नवीनतम वार्षिक आंकड़ों के अनुसार छत्तीसगढ़ में महिलाओं के विरुद्ध 8,601 मामले दर्ज किए गए हैं।

अपराध दर: राज्य में प्रति 1 लाख महिला जनसंख्या पर अपराध दर 56.3 है (जबकि राष्ट्रीय औसत दर 66.4 है)।

चार्जशीट दर: छत्तीसगढ़ पुलिस की मामलों में जांच पूरी कर अदालत में चालान/आरोप पत्र पेश करने की दर 71.3% रही है।

ट्रेंड: राज्य में साल 2022 में 8,693 मामले दर्ज हुए थे, जो 2023 में घटकर 8,035 हुए और हालिया रिपोर्ट में यह 8,601 दर्ज किए गए हैं।