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बिलासपुर। 28 अक्टूबर 2026| रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन की चपेट में आकर जान गंवाने वाली महिला के पति को जिला उपभोक्ता आयोग ने राहत दी है। आयोग ने प्रधानमंत्री जीवन ज्योति की बजाय प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमित महिला सुनीता वैष्णव की दुर्घटना में मौत पर बीमा राशि नहीं देने को सेवा में कमी माना है।

आयोग ने द ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को दो लाख रुपए की बीमा राशि के साथ 9 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है। मानसिक क्षतिपूर्ति के 25 हजार और वाद खर्च के 5 हजार रुपए बीमा कंपनी अलग से देगी।

आयोग ने साफ कहा है, आदेश की प्रति मिलने के 45 दिन के भीतर भुगतान करना होगा। जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल, सदस्य पूर्णिमा सिंह और आलोक कुमार पांडेय की पीठ ने यह फैसला सुनाया। मामला कोटा तहसील के ग्राम खुरदुर निवासी नोहर वैष्णव की पत्नी सुनीता वैष्णव की मौत से जुड़ा है।

पढ़िए क्या है मामला?

11 अगस्त 2024 को नोहर वैष्णव अपनी पत्नी और बेटे के साथ खेत गए थे। धान का थरहा लेकर लौटते समय सुनीता बिलासपुर-कटनी रेल लाइन पार कर रही थी। इसी दौरान कलमीटार और करगीरोड के बीच भुज सुपरफास्ट एक्सप्रेस की चपेट में आने से उसकी मौत हो गई। सुनीता के बैंक खाते से 27 मई 2024 को प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा योजना के नवीनीकरण के लिए 20 रुपए का प्रीमियम काटा गया था। पति ने बीमा कंपनी से दो लाख रुपए का दावा किया, लेकिन भुगतान नहीं होने पर उपभोक्ता आयोग में परिवाद पेश किया।

बीमा कंपनी के दावे को आयोग ने किया खारिज

बीमा कंपनी ने दावा खारिज करने के पक्ष में तर्क दिया कि महिला अधिकृत क्रॉसिंग से नहीं, बल्कि रेलवे ट्रैक पार कर रही थी। कंपनी के मुताबिक, यह प्रतिबंधित और जोखिम भरा काम था। आयोग ने पुलिस जांच, रेलवे की सूचना और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का परीक्षण किया। इसमें मौत दुर्घटनावश होने की पुष्टि हुई। आत्महत्या या या जानबूझकर मौत को जोखिम में डालने का कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिला। आयोग ने साफ कहा है, केवल रेलवे ट्रैक पार करने से यह साबित नहीं होता कि महिला ने जानबूझकर अपनी जान जोखिम में डाली थी।