रायपुर। 30 अक्टूबर 2026| ग्लोबल क्राइसिस और भाड़े की मार ने इस बार रोशनी के त्योहार का स्वाद बिगाड़ दिया है। इस बार दीपावली पर रोशनी और आतिशबाजी का लुत्फ उठाना आम आदमी के बजट की सीमाओं को चुनौती देने जा रहा है। त्योहार की आहट के साथ ही पटाखा बाजार में अचानक आई तेजी ने ग्राहकों के साथ-साथ खुदरा विक्रेताओं को भी हैरान कर दिया है। शहर के थोक व चिल्हर मंडियों में इस समय पटाखों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस दफा गगनचुंबी पटाखों के साथ-साथ महंगाई का पारा भी नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

उत्पादन केंद्रों से ही बढ़ा लागत का बोझ

स्थानीय विक्रेताओं की मानें तो इस बार निर्माण स्थलों याने सीधे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स से ही माल ऊंचे दामों पर डिस्पैच किया जा रहा है। बारूद, सल्फर और अन्य रासायनिक अवयवों के दामों में बढ़ोतरी के साथ-साथ ईंधन की दरों में आई तेजी को व्यापारी इसकी प्राथमिक वजह बता रहे हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर चल रहे अमेरिका- ईरान तनाव के कारण वैश्विक लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन की लागत प्रभावित होने का तर्क दिया जा रहा है। यद्यपि इन दावों का कोई स्पष्ट सरकारी या आधिकारिक इंडेक्स मौजूद नहीं है, लेकिन धरातल पर ग्राहकों को इसके लिए अतिरिक्त रकम चुकानी पड़ रही है।

सप्लाई चेन पर मौसम की भी पड़ी दोहरी मार

मूल्य वृद्धि के अलावा, इस बार बाजार में पटाखों की उपलब्धता भी एक बड़ा विषय बनी हुई है। देश के प्रमुख पटाखा निर्माण केंद्र, विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों में प्रतिकूल मौसम और लगातार हुई बारिश की वजह से उत्पादन चक्र बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, मांग के मुकाबले बाजार में खेप काफी कम पहुंच पा रही है। आपूर्ति में आई इस बड़ी कमी ने भी कीमतों को ऊपर धकेलने में ईंधन का काम किया है।

फैंसी स्काई शॉट्स से लेकर लड़ी तक पर चली कैंची

बाजार के मौजूदा रुझानों पर नजर डालें तो फैंसी स्काई शॉट्स की कीमतों में सबसे अधिक उछाल देखने को मिल रहा है, जहाँ दरें 20 से 25 प्रतिशत तक चढ़ चुकी हैं। पर्यावरण के अनुकूल माने जाने वाले ग्रीन क्रैकर्स की रेंज भी 15 से 25 फीसदी तक महंगी हो गई है। पारंपरिक आतिशबाजी जैसे अनार, चकरी और फुलझड़ियों के दाम औसतन 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़े हैं, जबकि सबसे अधिक मांग वाली लड़ी पटाखों की श्रृंखला 25 से 30 फीसदी तक की अभूतपूर्व तेजी दर्ज कर रही है।

खरीदारों का बिगड़ेगा गणित, व्यापारी भी चिंतित

दामों में हुई इस बेतहाशा बढ़ोतरी से न सिर्फ आम खरीदारों के त्योहार का बजट गड़बड़ा गया है, बल्कि व्यापारी भी बिक्री को लेकर आशंकित नजर आ रहे हैं। बाजार के जानकारों का कहना है कि पुरानी रेट लिस्ट और मौजूदा दरपत्रकों के सटीक मिलान के बिना बढ़ोतरी के आधिकारिक आंकड़े तय करना कठिन है, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि इस बार रोशनी का उत्सव हर वर्ग की जेब पर भारी पड़ने वाला है।