नोटिसों का रिकॉर्ड, कार्रवाई शून्य: बिलासपुर में युक्तियुक्तकरण पर उठे सवाल…FIR सिर्फ बयान
नोटिसों की बाढ़, कार्रवाई गायब: बिलासपुर में युक्तियुक्तकरण बना सवाल

बिलासपुर…युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बताने का दावा किया गया था। स्पष्ट कहा गया—किसी भी स्तर पर गलती सामने आई तो व्यक्तिगत जांच होगी और जिम्मेदारों पर FIR दर्ज होगी।
लेकिन बिलासपुर शिक्षा विभाग की स्थिति इस दावे से बिल्कुल उलट नजर आती है। राज्य में सबसे ज्यादा गड़बड़ियां यहीं सामने आईं, फिर भी आज तक किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नतीजा—चाहे मामला कोर्ट में हो या कलेक्टर के पास, जब कार्रवाई का डर ही नहीं रहा तो पूरे सिस्टम में खुला खेल शुरू हो गया।
फैसलों का उलटफेर: भरोसे पर चोट
मामलों की सबसे गंभीर परत तब सामने आती है जब कोर्ट में तय समयसीमा के भीतर जिन प्रकरणों को अमान्य किया जाता है, वही कुछ महीनों बाद फिर से मान्य हो जाते हैं।इसका सीधा असर—शिक्षक दोबारा उसी स्कूल में लौट आते हैं, जहां से उन्हें हटाया गया था। यह सिलसिला प्रक्रिया की विश्वसनीयता को सीधे कमजोर करता है।
नोटिस जारी, लेकिन नतीजा शून्य
कलेक्टर की जिला समिति के सामने प्रक्रिया को सख्त दिखाने के लिए बड़े पैमाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। प्रधान पाठकों से लेकर विकासखंड शिक्षा अधिकारियों तक, हर स्तर पर जवाब मांगे गए। प्रत्येक बीईओ को 25 से 50 तक नोटिस थमाए गए—संख्या इतनी बड़ी कि यह अपने आप में रिकॉर्ड बन गई।
जिला शिक्षा अधिकारी ने कलेक्टर के निर्देश पर स्पष्ट किया था कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एकतरफा कार्रवाई होगी। लेकिन इसके बाद पूरी प्रक्रिया ठहर गई। न किसी जवाब पर ठोस निर्णय, न ही किसी जिम्मेदार पर कार्रवाई।
‘अमान्य’ से ‘मान्य’ का चक्र
सबसे गंभीर आरोप यही है कि जिन मामलों को पहले अमान्य किया गया था, वही करीब 9 महीने बाद जनवरी-फरवरी 2025 में फिर से मान्य कर दिए गए। आरोप है कि इस बदलाव के पीछे लेन-देन हुआ और संबंधित शिक्षकों को वापस उन्हीं स्कूलों में भेज दिया गया।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
जब गड़बड़ियां स्पष्ट हैं, तो जिम्मेदारी तय क्यों नहीं हुई?
जब सैकड़ों नोटिस जारी हुए, तो कार्रवाई कहां रुकी?
और जब FIR की बात कही गई थी, तो अब तक किसी पर केस क्यों नहीं दर्ज हुआ?
बिलासपुर में युक्तियुक्तकरण की यह पूरी तस्वीर अब सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सिस्टम की साख पर खड़ा बड़ा सवाल बन चुकी है।





